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Teacher’s Day 2025: September 5 , Let’s know the history & importance of teacher’s day celebration.

Teacher’s Day 2025 Teacher’s day is celebrated on 5 September in the remembrance of Dr. Sarvepalli Radhakrishnan, wonderful teacher, philosopher and second president of India.  Happy teacher’s day 2025 He was also the record holder of Bharat Ratna, which is highest civilian award in India in 1954. Dr. Sarvepalli Radhakrishnan was born on September 5, 1888.He served as a professor at recognized institutions such as the University of Calcutta and Oxford University. When he became the president of India he was visited in school and students requested him to celebrate his birthday on September 5. From Now onwards, the students dedicated the day to teachers. Thus, September 5 being observed as Teacher’s Day in India. This day students organize programme in school and institutions like giving speeches on occasion, performed drama on skit, sing songs, perform dance etc. Teacher’s day on September 5 is not only celebration of Dr. Sarvepalli Radhakrishnan’s birth anniversary, but it also celebrated for our teacher’s hardwork and determination which they shows us whole year with dedication. Students honor their teachers by giving teacher’s day card, bouquet, chocolate, gifts to their favorite teachers and make this day memorable for teachers too. In various schools there was different ideas to celebrate this honorable occasion of teachers day which is on 5 september 2025.  some of them were senior students of that respected schools were become teachers to handover the position of teachers that day and the teachers will be rest on that particular day, enjoy the occasion which so ever organized by the senior students of the school after all they will be going next year in their professional life journey so this day also becomes memorable for students too quiet interest ..   FAQ (2025) Q. Why is teacher’s day celebrated? A. Teachers day is celebrated in the remembrance of a great teacher named Dr. Sarvepalli Radhakrishnan and to honour the whole nations teacher who worked hard all over the year for students with dedication. Q. Is it teachers day or teacher’s day? A. It is teacher’s day Q. Is teacher’s day is a holiday? A. It depends whether it is Sunday or not, or other occasion given in calender. Q. When is teacher’s day in India? A. It is on September 5 every year. Quotes on teacher’s day: ” A teacher who teaches you, the true meaning of learning with his/her experience. “ “Our first teacher is our mother and father, so greet them first” external sources – https://www.moneycontrol.com/education/teachers-day-2025-school-morning-speech-poem-and-short-speech-ideas-for-students-article-13516604.html  

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आत्मनिर्भर भारत पर निबंध

आत्मनिर्भर भारत पर निबंध in 1500 words आत्मनिर्भर भारत पर निबंध 2025 भारत एक प्राचीन और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत वाला देश है। आधुनिक भारत में आत्मनिर्भरता की आवश्यकता और महत्व पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है। कोरोना महामारी के दौरान यह स्पष्ट हो गया कि किसी भी राष्ट्र को वैश्विक संकटों से निपटने के लिए आत्मनिर्भर होना ही चाहिए। इसी दिशा में भारत सरकार ने “आत्मनिर्भर भारत अभियान” की शुरुआत की। यह अभियान न केवल आर्थिक स्वतंत्रता की दिशा में एक कदम है, बल्कि यह देश की समग्र उन्नति की नींव है। आत्मनिर्भर भारत का अर्थ: आत्मनिर्भर भारत का अर्थ है— एक ऐसा भारत जो न केवल अपने नागरिकों की आवश्यकताओं की पूर्ति स्वयं कर सके, बल्कि वैश्विक बाज़ार में भी सशक्त रूप से प्रतिस्पर्धा कर सके। इसका मतलब यह नहीं कि भारत दुनिया से कट जाए, बल्कि यह कि भारत अपने संसाधनों, तकनीक और नवाचार पर भरोसा करके अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति करे। आत्मनिर्भर भारत अभियान की शुरुआत: 12 मई 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने “आत्मनिर्भर भारत अभियान” का शुभारंभ किया और 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज की घोषणा की। इस पैकेज का उद्देश्य देश की अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करना, छोटे व्यापारों को सहायता देना, कृषि क्षेत्र को मज़बूती देना और निर्माण व सेवा क्षेत्र को गति देना था। आत्मनिर्भर भारत के पांच स्तंभ: प्रधानमंत्री मोदी ने आत्मनिर्भर भारत अभियान को पाँच स्तंभों पर आधारित बताया: 1. अर्थव्यवस्था (Economy) 2. इंफ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure) 3. प्रौद्योगिकी आधारित प्रणाली (Technology-driven system) 4. जनसांख्यिकी लाभ (Demography) 5. मांग (Demand) आत्मनिर्भरता के लाभ: 1. रोजगार के अवसर:स्वदेशी उद्योगों और स्टार्टअप को बढ़ावा मिलने से युवाओं को रोज़गार के अवसर मिलते हैं। 2. आर्थिक मजबूती:जब देश खुद अपने उत्पाद बनाएगा, तो विदेशी निर्भरता घटेगी और विदेशी मुद्रा की बचत होगी। 3. वैज्ञानिक और तकनीकी उन्नति:आत्मनिर्भर बनने के लिए अनुसंधान, नवाचार और तकनीक में निवेश बढ़ता है। 4. सुरक्षा में वृद्धि:रक्षा, औषधि और कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता से किसी भी वैश्विक आपदा या युद्ध जैसे हालात में देश मज़बूत रहेगा। महत्वपूर्ण योजनाएँ और प्रयास: मेक इन इंडिया स्टार्टअप इंडिया डिजिटल इंडिया उज्ज्वला योजना प्रधानमंत्री मुद्रा योजना वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) चुनौतियाँ: तकनीकी और औद्योगिक संसाधनों की कमी शिक्षा और कौशल विकास की धीमी गति भ्रष्टाचार और नौकरशाही की बाधाएँ ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी समाधान और सुझाव: शिक्षा और कौशल विकास को प्राथमिकता दी जाए। स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए जन जागरूकता फैलाई जाए। नवाचार और अनुसंधान को सहयोग मिले। न्यायिक और प्रशासनिक सुधार लाए जाएँ जिससे योजनाएँ ज़मीन पर ठीक से उतरें। — निष्कर्ष: आत्मनिर्भर भारत अभियान केवल एक सरकारी योजना नहीं है, यह एक राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया है जिसमें हर नागरिक की भागीदारी आवश्यक है। हमें मिलकर यह संकल्प लेना होगा कि हम “वोकल फॉर लोकल” रहेंगे और स्वदेशी उत्पादों को अपनाकर देश को आत्मनिर्भर बनाएँगे। यही देश के उज्ज्वल भविष्य की कुंजी है।   आत्मनिर्भर भारत पर अक्सर पूछे जाने वाले सवाल   1. आत्मनिर्भर भारत क्या है? आत्मनिर्भर भारत का मतलब है कि भारत को अपनी ज़रूरतें पूरी करने के लिए खुद पर निर्भर होना चाहिए। इसका उद्देश्य देश में हर क्षेत्र (जैसे उद्योग, कृषि और स्वास्थ्य) को मज़बूत बनाना है ताकि हम दूसरे देशों पर कम निर्भर रहें। 2. आत्मनिर्भर भारत का मुख्य उद्देश्य क्या है? इसका मुख्य उद्देश्य भारत की अर्थव्यवस्था को बढ़ाना, आधुनिक तकनीक का विकास करना और अपने देश में ही ज़्यादा से ज़्यादा सामान बनाना है। इस अभियान का लक्ष्य भारत को एक मज़बूत और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाना है। 3. एक छात्र के लिए आत्मनिर्भरता का क्या मतलब है? एक छात्र के लिए आत्मनिर्भरता का मतलब है सिर्फ़ पढ़ाई पर ध्यान देना ही नहीं, बल्कि अपने कौशल (skills) को भी विकसित करना। इसका मतलब है कि आप अपनी सोच और रचनात्मकता (creativity) का इस्तेमाल करके अपनी समस्याओं को खुद हल कर सकें। 4. आत्मनिर्भर भारत के लिए सरकार क्या कर रही है? सरकार ने इस अभियान के तहत कई योजनाएँ शुरू की हैं, जैसे ‘मेक इन इंडिया’, और MSMEs (छोटे और मध्यम उद्योग) को बढ़ावा देना। इन योजनाओं का उद्देश्य देश में ही ज़्यादा से ज़्यादा उत्पादन (production) करना है। 5. आत्मनिर्भर बनने के लिए हमें क्या करना चाहिए? आत्मनिर्भर बनने के लिए हमें अपनी मानसिकता (mindset) बदलनी होगी। हमें नई चीज़ें सीखनी चाहिए, स्थानीय (local) उत्पादों को खरीदना चाहिए, और अपनी रचनात्मकता का इस्तेमाल करके अपने जीवन को बेहतर बनाना चाहिए। यह सिर्फ़ एक आर्थिक योजना नहीं, बल्कि एक नया दृष्टिकोण है। 5. आत्मनिर्भर बनने के लिए हमें क्या करना चाहिए? आत्मनिर्भर बनने के लिए हमें अपनी मानसिकता (mindset) बदलनी होगी। हमें नई चीज़ें सीखनी चाहिए, स्थानीय (local) उत्पादों को खरीदना चाहिए, और अपनी रचनात्मकता का इस्तेमाल करके अपने जीवन को बेहतर बनाना चाहिए। यह सिर्फ़ एक आर्थिक योजना नहीं, बल्कि एक नया दृष्टिकोण है। 6. आत्मनिर्भर भारत अभियान की शुरुआत कब और क्यों हुई? इस अभियान की शुरुआत मई 2020 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई थी। इसका मुख्य कारण COVID-19 महामारी के दौरान supply chain में आई रुकावटें थीं। इस अभियान का उद्देश्य भारत को इन बाहरी चुनौतियों का सामना करने के लिए और ज़्यादा मज़बूत बनाना था। 7. “लोकल के लिए वोकल” का क्या मतलब है? “लोकल के लिए वोकल” का मतलब है कि हमें स्थानीय (local) उत्पादों को ख़रीदना और उन्हें बढ़ावा देना चाहिए। जब हम अपने देश में बने सामानों को प्राथमिकता देते हैं, तो हम स्थानीय उद्योगों और कारीगरों का समर्थन करते हैं। 8. आत्मनिर्भर भारत का सबसे बड़ा फ़ायदा क्या है? इसका सबसे बड़ा फ़ायदा यह है कि यह हमारे देश को आर्थिक रूप से और ज़्यादा शक्तिशाली और स्थिर बनाता है। जब हम अपनी ज़रूरतों को खुद पूरा कर सकते हैं, तो हमें किसी भी बाहरी दबाव या संकट का सामना करने में आसानी होती है। 9. क्या आत्मनिर्भर भारत का मतलब यह है कि हम दूसरे देशों से व्यापार बंद कर देंगे? नहीं, इसका मतलब बिल्कुल भी यह नहीं है। आत्मनिर्भरता का उद्देश्य यह है कि हम दूसरे देशों पर अपनी निर्भरता कम करें, न कि उनके साथ व्यापार बंद करें। यह हमें एक मज़बूत स्थिति में लाता है, ताकि हम और ज़्यादा बेहतर शर्तों पर

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प्रदूषणम् (प्रदूषण पर संस्कृत निबंध – Pollution in Sanskrit)

प्रदूषणम् (प्रदूषण पर संस्कृत निबंध – Pollution in Sanskrit)   वर्तमाने युगे विज्ञानस्य अद्भुतविकासः जातः अस्ति। मनुष्यः सुख-सुविधाभिः युक्तं जीवनं जीव्य इच्छति। किन्तु अस्य सुख-साधनानां अत्यधिकोपयोगेन तस्य जीवनं …प्रस्तावना: वर्तमाने युगे विज्ञानस्य अद्भुतविकासः जातः अस्ति। मनुष्यः सुख-सुविधाभिः युक्तं जीवनं जीव्य इच्छति। किन्तु अस्य सुख-साधनानां अत्यधिकोपयोगेन तस्य जीवनं संकटमयम् जातम् अस्ति। विज्ञानस्य अति प्रयोगः, नगरीकरणम्, उद्योगधन्दाः च पर्यावरणस्य सन्तुलनं नाशयन्ति। अयं पर्यावरणनाशः एव ‘प्रदूषणम्’ इति कथ्यते। प्रदूषणस्य परिभाषा प्रदूषणम्  नाम तानि सर्वाणि विकृतिकारकाणि कारणानि च येन वायुः, जलम्, भूमिः च मलिनाः भवन्ति, तथा च प्राणीणां स्वास्थ्यं बाध्यते। यत्र यत्र स्वाभाविकवातावरणस्य दोष उत्पद्यते तत्र तत्र प्रदूषणं भवति। प्रदूषणस्य प्रकाराः1. वायुप्रदूषणम् (Air Pollution)धूम्रपानं, वाहनानां धूमः, उद्योगानां धूमा: च वायोः शुद्धतां नाशयन्ति। तस्मात् वायुप्रदूषणं भवति। 2. जलप्रदूषणम् (Water Pollution)उद्योगानां विषाक्तद्रव्याणि, नदीनां सरितां च जलं मलिनं कुर्वन्ति। ग्रामेभ्यः अपि मलजलं जलाशयानां मध्ये प्रवेशयति। एतेन जलेषु जीवनं कठिनं भवति। 3. भूमिप्रदूषणम् (Soil Pollution)कृत्रिम-खाद्य-रसायनानां अधिकं प्रयोगः, प्लास्टिकद्रव्याणां विसर्जनं च भूमेः प्रदूषणं जनयति। 4. ध्वनिप्रदूषणम् (Noise Pollution)तीव्र-शब्दयुक्ताः वाहनाः, यन्त्राणि, ध्वनिवर्धकयन्त्राणि च मानवस्य कानानां कष्टं यच्छन्ति। 5. प्रकाशप्रदूषणम् (Light Pollution)रात्रौ अति-प्रकाशयुक्तवातावरणं च नेत्राणि बाधते, निद्रायाः व्यवधानं च करोति। प्रदूषणस्य कारणानि प्रदूषणस्य कारणानि अनेके सन्ति, तत्र मुख्यानि कारणानि निम्नानुसारम् सन्ति: यन्त्रयुगस्य आरम्भः वहनानां वृत्तिः औद्योगिकविकासः वृक्षच्छेदनम् प्लास्टिकद्रव्याणां अत्यधिकोपयोगः जलशुद्धिसंरक्षणे अवधानस्य अभावः प्रदूषणस्य दुष्परिणामाः प्रदूषणस्य परिणामाः अतीव भयावहाः भवन्ति। मानवजीवनं, पशुपक्षिणां जीवनं, वृक्षाणां वृद्धिः, जलचरजीवनं च प्रदूषणेन बाध्यते। स्वास्थ्यसमस्या: अस्थमा, क्षयरोगः, चर्मरोगः, कैंसररोगः च वर्धन्ते। पर्यावरणनाशः: ओषधयोः क्षयो भवति, जलचराणां मरणं भवति। ओजोनस्तरस्य हानिः: वायुप्रदूषणेन ओजोनस्तरः क्षीणो भवति। वातावरणीयसंतुलनभंगः: ऋतुव्यवस्था विकृतं भवति, अतिवृष्टिः, अनावृष्टिः च दृश्यते। प्रदूषणनिवारणाय उपायाःप्रदूषणस्य निराकरणाय कतमः उपायः करणीयः इति चिन्तनीयम् अस्ति। एते उपायाः प्रदूषणनिरोधाय उपयोजनीयाः सन्ति। 1. वृक्षारोपणम्वृक्षाः वायोः शुद्धता स्थापयन्ति। प्रत्येकः जनः कमपि वृक्षं रोपयेत्। 2. पुनःउपयोगः (Recycling)प्लास्टिकवस्तूनां पुनः उपयोगः करणीयः। सः भूमेः प्रदूषणं रोद्धुं समर्थः अस्ति। 3. विकल्पानां उपयोगःकोइलेन चाल्यमानयन्त्राणां स्थाने सौरऊर्जा, पवनशक्तेः उपयोगः कर्तव्यः। 4. यन्त्रसङ्ख्यायाः नियन्त्रणम्वाहनानां सङ्ख्या नियंत्रणीयम्। जनाः एकत्र आस्थाय यात्रा कुर्वन्तु। 5. शासनस्य नियमाःशासनं कठोरनियमं स्थापयेत्, विशेषतः उद्योगानां विषाक्तनिर्गमने विषये। 6. जनजागरूकताविद्यालयेषु, समाजे च प्रदूषणविषये शिक्षा दातव्या। ‘स्वच्छ भारत अभियानः’ इत्यादयः जनजागरूकतायाः उदाहरणानि सन्ति। प्रदूषणनिवारणे आधुनिकाः प्रयासाः 1. ‘स्वच्छ भारत अभियानः’भारतसरकारा २०१४ तमे वर्षे ‘स्वच्छ भारत अभियानं’ आरब्धवती, यत्र जनाः स्वच्छतायाः विषये शिक्षां प्राप्नुवन्ति। 2. ‘राष्ट्रीय हरित अधिकरणम्’ (NGT)अयं न्यायालयः पर्यावरणदूषणं विरुद्धं कार्यं करोति। 3. ‘प्लास्टिकप्रतिबन्धः’अनेके राज्ये प्लास्टिकपात्राणां उपयोगः निषिद्धः जातः अस्ति। 4. इको–फ्रेंडली वस्तूनां प्रोत्साहनम्पत्रपात्रे, मृत्तिकापात्रे, पुनःउपयोग्यवस्तूनां प्रयोगः प्रोत्साहितः अस्ति। सुभाषितानि (संदेशदायक श्लोकाः) > पर्यावरणं रक्षेम यदि जीवनं रक्षाम।वृक्षाः बन्धवः सदा – तेषां संरक्षणं कुर्मः।शुद्धं जलं, शुद्धं वायुः – स्वास्थ्याय वरदं भवेत्। उपसंहारः प्रदूषणं मानवकृतं महत्तरं संकटम् अस्ति। यदि वयं इदानीं जाग्रताः न भवामः तर्हि भविष्ये मनुष्यजीवनस्य अस्तित्वं सन्देहास्पदं भविष्यति। प्रकृतिः अस्माकं माता अस्ति – तस्या रक्षणं अस्माकं कर्तव्यम्। “प्रदूषणरहितं जीवनं – स्वास्थ्यपूर्णं जीवनं” इति ध्येयं कृत्वा वयं सर्वे एकत्र मिलित्वा कार्यं कुर्मः।  

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MP Online आंगनवाड़ी भर्ती 2025: आवेदन प्रक्रिया, योग्यता, और पूरी जानकारी

मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए एक शानदार अवसर आया है। MP Online पोर्टल के माध्यम से आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका और मिनी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता पदों पर भर्ती प्रक्रिया 2025 शुरू हो चुकी है। महिला एवं बाल विकास विभाग (WCD MP) द्वारा यह भर्ती आयोजित की जा रही है। इस ब्लॉग में हम आपको MP Online आंगनवाड़ी भर्ती से जुड़ी पूरी जानकारी देने जा रहे हैं, जैसे आवेदन प्रक्रिया, योग्यता, जरूरी दस्तावेज़, चयन प्रक्रिया, और महत्वपूर्ण तिथियां। भर्ती का नाम MP आंगनवाड़ी भर्ती 2025 विभाग महिला एवं बाल विकास विभाग (WCD)पद का नाम आंगनवाड़ी कार्यकर्ता/सहायिकाआवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन (MP Online Portal)स्थान मध्य प्रदेश पदों का विवरण (Post Details): आंगनवाड़ी कार्यकर्ता आंगनवाड़ी सहायिका शैक्षणिक योग्यता (Eligibility Criteria): आंगनवाड़ी कार्यकर्ता: न्यूनतम 12वीं पास। आवेदन कैसे करें? (How to Apply Online) 1. सबसे पहले MP Online पोर्टल पर जाएं: https://www.mponline.gov.in 2. “आंगनवाड़ी भर्ती 2025” लिंक पर क्लिक करें। 3. रजिस्ट्रेशन करें और लॉगिन करें। 4. आवेदन फॉर्म भरें और आवश्यक दस्तावेज़ अपलोड करें। 5. आवेदन सबमिट करें और रसीद का प्रिंट निकालें। चयन प्रक्रिया (Selection Process): 1. मेरिट लिस्ट के आधार पर चयन। 2. कोई लिखित परीक्षा नहीं। 3. अंतिम चयन इंटरव्यू/दस्तावेज़ सत्यापन के बाद होगा। महत्वपूर्ण लिंक: 👉 आवेदन करने के लिए क्लिक करें: MP Online Portal

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Global Warming – A Threat to Our Future

Global warming is one of the most critical environmental issues of our time. It refers to the gradual increase in the Earth’s average surface temperature due to the excessive release of greenhouse gases into the atmosphere. These gases trap heat from the sun, causing a rise in global temperatures. Over the past few decades, scientists and environmentalists have raised serious concerns about the adverse effects of global warming on nature and human life. It is not just a future threat but a present reality that needs urgent action. Causes of Global WarmingThe primary cause of global warming is human activity. Although natural processes such as volcanic eruptions and solar variations contribute slightly, the significant rise in temperature over the last century is largely due to: 1. Burning of Fossil Fuels: The use of coal, oil, and natural gas for electricity, heating, and transportation releases enormous amounts of carbon dioxide (CO₂), the chief greenhouse gas. 2. Deforestation: Forests act as carbon sinks. Cutting down trees reduces the planet’s ability to absorb CO₂, worsening global warming. 3. Industrial Activities: Factories and power plants release not only CO₂ but also methane (CH₄) and nitrous oxide (N₂O), which have even higher warming potential. 4. Agricultural Practices: Use of chemical fertilizers, rice cultivation, and livestock farming emit greenhouse gases such as methane and nitrous oxide. 5. Waste Mismanagement: Landfills produce methane gas due to decomposition of organic waste. 6. Overpopulation and Urbanization: More people mean more cars, homes, industries, and hence more emissions. Greenhouse Effect and Its Role Global warming is not just about hotter summers; it has wide-ranging and severe effects: 1. Rising Sea Levels: Melting polar ice caps and glaciers contribute to sea level rise, threatening low-lying areas and islands. 2. Extreme Weather Events: More frequent and intense heatwaves, storms, floods, and droughts have been linked to global warming. 3. Threat to Biodiversity: Species are losing their habitats and facing extinction. Coral reefs, for instance, are bleaching due to warmer oceans. 4. Impact on Agriculture: Irregular rainfall, droughts, and extreme temperatures affect crop yield, leading to food insecurity. 5. Health Hazards: Increase in heat-related illnesses, spread of vector-borne diseases like malaria and dengue, and poor air quality affect human health. 6. Ocean Acidification: CO₂ is being absorbed by oceans, changing their pH levels and harming marine life. Global Initiatives and AgreementsTo combat global warming, countries across the world have come together to sign environmental agreements such as: Kyoto Protocol (1997): The first international treaty that committed countries to reduce emissions. Paris Agreement (2015): A landmark deal where 196 countries pledged to limit global temperature rise to well below 2°C and pursue efforts to limit it to 1.5°C. United Nations Climate Change Conferences (COP Summits): Annual meetings to review progress and negotiate further climate actions. India’s Role and EffortsIndia, being a developing country, faces a dual challenge—growth and sustainability. However, it has taken several steps: National Action Plan on Climate Change (NAPCC): Includes missions on solar energy, energy efficiency, and sustainable agriculture. International Solar Alliance (ISA): Co-founded by India to promote solar energy globally. Panchamrit Goals: Announced by India at COP26 to achieve net-zero carbon emissions by 2070. Promotion of Electric Vehicles: India is encouraging cleaner transportation. What Can Individuals Do?The fight against global warming cannot be won without the participation of common people. Simple steps can bring big changes: Use public transport, cycle, or walk to reduce carbon emissions. Turn off electrical appliances when not in use. Plant trees and protect green spaces. Recycle, reduce, and reuse materials. Support sustainable brands and avoid overconsumption. Educate others about climate change. ConclusionGlobal warming is a reality we can no longer ignore. Its effects are being felt all around us—from rising seas to extreme weather patterns. If not addressed urgently, it could lead to irreversible damage to our planet. The time to act is now. Governments, industries, communities, and individuals must all work together to reduce emissions and adopt sustainable practices. Only with collective action can we safeguard the Earth for future generations.

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गर्मी की छुट्टियाँ – लैंसडाउन की यात्रा
Essay on summer vacation in hindi

गर्मी की छुट्टियाँ वर्ष का वह विशेष समय होता है जब छात्रों को पढ़ाई और दिनचर्या से थोड़ी राहत मिलती है। यह समय न केवल मनोरंजन का होता है, बल्कि आत्मनिरीक्षण, रचनात्मकता और अपने प्रियजनों के साथ यादगार पल बिताने का अवसर भी देता है। इस वर्ष की छुट्टियाँ मेरे लिए और भी खास थीं, क्योंकि मैंने उन स्थानों की यात्रा की जहाँ मेरे बचपन की अनेक स्मृतियाँ जुड़ी हुई हैं—लैंसडाउन, जहाँ मैंने अपने जीवन के प्रारंभिक वर्ष बिताए और स्कूल की पढ़ाई की। अतीत से वर्तमान की यात्रा: लैंसडाउन का आमंत्रण जैसे ही गर्मी की छुट्टियाँ शुरू हुईं, मन ने एक विशेष जगह पर जाने की इच्छा जताई—लैंसडाउन, उत्तराखंड की पहाड़ियों में बसा एक शांत, स्वच्छ और मनोहारी स्थल। यह वह स्थान था जहाँ मैंने अपना बचपन बिताया था, और वहीं मेरा पहला स्कूल भी था। वर्षों बाद उसी भूमि को दोबारा देखने का अवसर मिला, तो मैं बेहद उत्साहित थी। मेरे माता-पिता ने इस विचार को सहर्ष स्वीकार किया और हम कार से लैंसडाउन के लिए रवाना हुए। रास्ते भर पहाड़ों की हरियाली, ठंडी हवा और लहराते पेड़ों ने मन को सुकून दिया। जैसे-जैसे हम मंज़िल के करीब पहुँच रहे थे, बचपन की यादें और भी स्पष्ट होती जा रही थीं। बचपन की किताबों के पन्ने: मेरा स्कूल लैंसडाउन पहुँचकर सबसे पहले मैंने अपने पुराने स्कूल जाने का निश्चय किया। वह स्थान मेरे लिए केवल ईंट-पत्थर की एक इमारत नहीं था, बल्कि यादों की एक जीवंत पुस्तक थी। जैसे ही मैं स्कूल पहुँची, मेरी आँखें भर आईं। वह वही प्रांगण था जहाँ मैंने अक्षर ज्ञान सीखा था, जहाँ पहली बार दोस्तों के साथ हँसी-ठिठोली की थी, और जहाँ मेरी मासूमियत ने आकार लिया था। स्कूल अब थोड़ा बदल चुका था—नई रंगाई-पुताई हुई थी, बेंचें आधुनिक हो चुकी थीं, लेकिन उस स्थान की आत्मा वही थी। वहाँ के एक शिक्षक ने मुझे पहचाना और गर्मजोशी से स्वागत किया। मैंने कक्षा में जाकर बच्चों के साथ कुछ समय बिताया और अपनी बचपन की सीट को फिर से छूकर देखा। वह क्षण मेरे जीवन का एक अमूल्य उपहार बन गया। लैंसडाउन की सैर: प्रकृति की गोद में इसके बाद हमने लैंसडाउन के प्रमुख दर्शनीय स्थलों की सैर की। टिप-इन-टॉप नामक स्थान से पूरे पहाड़ों का अद्भुत दृश्य दिखाई देता है। वहाँ से सूर्यास्त देखना एक स्वप्निल अनुभव था। हमने भुल्ला ताल में नौका विहार भी किया, जहाँ शांत जल में पहाड़ों की परछाईं दिख रही थी। इसके अलावा हमने सेंट मैरी चर्च, वार मेमोरियल, और स्थानीय बाजार में भी भ्रमण किया। बाजार में हाथ से बनी लकड़ी की वस्तुएँ और ऊनी कपड़े बेहद सुंदर थे। मैंने अपने लिए एक पहाड़ी टोपी और एक हस्तशिल्प की डायरियाँ खरीदीं, जो मेरी इस यात्रा की यादें संजो कर रखेंगी। भोजन और पहाड़ी स्वाद: लैंसडाउन में स्थानीय पहाड़ी व्यंजन जैसे भट्ट की चूड़कानी, आलू के गुटके, और झोली का स्वाद भी लिया। इन व्यंजनों की सादगी में जो स्वाद था, वह बड़े-बड़े होटलों में नहीं मिलता। गर्मी के मौसम में भी वहाँ का वातावरण ठंडा और ताजगी से भरपूर था। यह सब मेरे शहर के शोर-गुल से बिल्कुल अलग था। समय का सदुपयोग: इस यात्रा से लौटकर मैंने शेष छुट्टियाँ रचनात्मक और ज्ञानवर्धक कार्यों में बिताईं। प्रतिदिन सुबह योग और प्राणायाम करना मेरी दिनचर्या में शामिल हो गया। साथ ही मैंने डायरी लेखन को जारी रखा, जिसमें मैंने लैंसडाउन यात्रा के अनुभव, अपने स्कूल की पुरानी यादें, और अपनी भावनाएँ दर्ज कीं। इसके अतिरिक्त मैंने ऑनलाइन कोर्स के माध्यम से फोटोग्राफी के कुछ मूलभूत ज्ञान प्राप्त किए, जिससे मेरी यात्रा की तस्वीरें और बेहतर हो सकें। कुछ दोस्तों को प्रेरित कर हमने मिलकर एक “ग्रीन बालकनी प्रोजेक्ट” भी शुरू किया, जिसमें हमने पौधों को सजाया और घर को हरा-भरा बनाया। पारिवारिक समय और सहयोग: गर्मी की छुट्टियाँ परिवार के साथ समय बिताने का भी आदर्श समय होता है। इस दौरान मैंने माँ से कुछ पारंपरिक पकवान जैसे पूड़ी-आलू, हलवा, और आमरस बनाना सीखा। पापा के साथ बैठकर हमने कई पुराने एल्बम देखे और मेरे बचपन की कुछ तस्वीरें खोजीं, जिनमें से कई लैंसडाउन की ही थीं। गर्मी की छुट्टियाँ हर किसी के जीवन में विशेष महत्व रखती हैं। इनका सदुपयोग करके हम न केवल नई ऊर्जा प्राप्त कर सकते हैं, बल्कि अपने जीवन में स्थायी और सकारात्मक परिवर्तन भी ला सकते हैं। मेरी लैंसडाउन यात्रा और अपने स्कूल की पुनः मुलाक़ात इस बार की छुट्टियों को स्मृति-पटल पर अमिट बना गई। यह अनुभव हमेशा मेरे साथ रहेगा, प्रेरणा बनकर।            गर्मी की छुट्टियाँ, यादों की मिठास!”

गर्मी की छुट्टियाँ – लैंसडाउन की यात्रा
Essay on summer vacation in hindi
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अहिल्याबाई होलकर पर निबंध (5000 शब्दों में)

भूमिका अहिल्याबाई होलकर “नारी शक्ति की प्रतीक, परोपकार की देवी और एक आदर्श शासिका” – यह विशेषण किसी साधारण स्त्री के लिए नहीं, बल्कि अहिल्याबाई होलकर के लिए हैं, जो भारत के इतिहास में एक उज्ज्वल अध्याय के रूप में सजीव हैं। उन्होंने 18वीं सदी में न केवल एक प्रभावशाली राज्य का संचालन किया, बल्कि जनकल्याण, धर्म, न्याय और संस्कृति के क्षेत्र में भी अतुलनीय योगदान दिया।                 “जहाँ न्याय की देवी हो, वहाँ प्रजा को भय नहीं होता – अहिल्याबाई होलकर” “नारी अगर चाहे तो इतिहास बदल सकती है – अहिल्याबाई इसका उदाहरण हैं।”   अहिल्याबाई होलकर प्रारंभिक जीवन अहिल्याबाई होलकर का जन्म 31 मई 1725 को महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के चौंडी गाँव में हुआ था। उनके पिता मानकोजी शिंदे एक सामान्य लेकिन धार्मिक प्रवृत्ति के व्यक्ति थे। यह वह समय था जब स्त्रियों को शिक्षा या सार्वजनिक जीवन में भागीदारी का अवसर नहीं मिलता था, लेकिन उनके पिता ने अहिल्याबाई को न केवल पढ़ाया-लिखाया बल्कि सामाजिक कार्यों की ओर भी प्रेरित किया। “शिक्षा का दीपक स्त्रियों के हाथ में भी जल सकता है – चौंडी की बेटी इसका प्रमाण है।” विवाह और जीवन की नई दिशा 14 वर्ष की उम्र में उनका विवाह मल्हारराव होलकर के पुत्र खांडेराव होलकर से हुआ, जो मालवा के शासक परिवार से थे। इस विवाह ने अहिल्याबाई के जीवन को नया मोड़ दिया। खांडेराव वीर योद्धा थे, लेकिन 1754 में कुंभेरे के युद्ध में उनकी मृत्यु हो गई। इसके पश्चात अहिल्याबाई ने सती होने का निश्चय किया, परंतु ससुर मल्हारराव ने उन्हें रोका और जीवन को प्रजा की सेवा में लगाने की सलाह दी। — राजनीतिक यात्रा की शुरुआत 1766 में मल्हारराव होलकर की मृत्यु के बाद अहिल्याबाई ने मालवा राज्य की बागडोर संभाली। उस समय न केवल राज्य में अराजकता थी, बल्कि महिला के शासक बनने को लेकर कई विरोध भी थे। उन्होंने धैर्य और विवेक से शासन व्यवस्था को संभाला और एक आदर्श शासिका बनकर उभरीं। शासन प्रणाली न्यायप्रियता: अहिल्याबाई खुले दरबार में न्याय करती थीं। वह स्वयं वादी-प्रतिवादी की बात सुनतीं और त्वरित निर्णय देतीं। प्रशासनिक दक्षता: उन्होंने अधिकारियों की नियुक्ति योग्यता के आधार पर की और भ्रष्टाचार पर सख्त नियंत्रण रखा। सैनिक संगठन: उन्होंने सेना को सशक्त बनाया और सीमाओं की रक्षा सुनिश्चित की।         “जहाँ रानी न्याय करे, वहाँ अन्याय दम नहीं भर सकता।”⚔️ “शक्ति और करुणा का अद्भुत संगम – अहिल्याबाई होलकर।” सांस्कृतिक और धार्मिक योगदान “जिसने देवों के घर संवारे, वह खुद देवी समान है।” समाज सुधार और लोककल्याण अहिल्याबाई ने कई सामाजिक सुधार किए: स्त्री शिक्षा को प्रोत्साहन। विधवाओं को सम्मानजनक जीवन देने की व्यवस्था। कृषि विकास के लिए नहरें, कुएँ, तालाब बनवाए। व्यापार को प्रोत्साहन देने के लिए करों में कटौती की। गरीबों, विधवाओं, अपंगों के लिए आश्रयगृह बनाए। “जिस शासक को अपनी प्रजा पुत्रवत् हो, वही सच्चा राजा होता है।” व्यक्तित्व और नेतृत्व गुण अहिल्याबाई एक कुशल प्रशासक, धर्मनिष्ठ, दृढ़निश्चयी, दयालु और दूरदर्शी नेता थीं। उनका जीवन संयम, सेवा और साधना का उदाहरण था। वह अपने राज्य में हर व्यक्ति को अपने परिवार का अंग मानती थीं। गुण: धर्मनिष्ठा न्यायप्रियता करुणा और सहृदयता संगठन कुशलता दूरदर्शिता      “नेतृत्व वह नहीं जो शासन करे, बल्कि वह जो सेवा से दिलों को जीते – अहिल्याबाई जैसी।”   मृत्यु और विरासत 13 अगस्त 1795 को 70 वर्ष की आयु में अहिल्याबाई ने देहत्याग किया। उनका जीवन आज भी प्रेरणा का स्रोत है। उनके कार्यों और आदर्शों को याद करते हुए इंदौर में उनके नाम से विश्वविद्यालय, संस्थाएँ, सड़कें, तथा प्रतिमाएँ स्थापित हैं। आज के संदर्भ में प्रासंगिकता अहिल्याबाई का जीवन आज की नारी के लिए प्रेरणा है। जहाँ एक ओर वह शासक थीं, वहीं दूसरी ओर मातृत्व, सेवा और धर्म का प्रतीक भी। भारत में महिला सशक्तिकरण की बात करते समय उनका नाम स्वर्ण अक्षरों में आता है। निष्कर्ष अहिल्याबाई होलकर का जीवन यह सिखाता है कि संकल्प, सेवा और साहस से कोई भी कार्य असंभव नहीं। उन्होंने यह साबित कर दिखाया कि नारी केवल घर की रानी नहीं, बल्कि राज्य की भी महारानी बन सकती है। उनके न्याय, धर्म, सामाजिक सेवा और संस्कृति के लिए योगदान को हम युगों तक नहीं भूल सकते।   पुस्तकें (Books): 1. “Ahilyabai Holkar: The Philosopher Queen” – लेखक: Nalini Natarajan > यह पुस्तक अहिल्याबाई के प्रशासन, धार्मिक योगदान और सामाजिक सुधारों को विस्तार से प्रस्तुत करती है। 2. “Women Bhakt Saints of India” – लेखक: A. K. Warder > इसमें अहिल्याबाई के धार्मिक कार्यों और भक्ति परंपरा से जुड़े योगदान का उल्लेख है। 3. “Madhya Pradesh Ki Pramukh Nari Shasikaayein” – राज्य साहित्य अकादमी, भोपाल > मध्यप्रदेश की महिला शासकों में अहिल्याबाई के शासनकाल का विस्तृत वर्णन है। 4. “Great Women of India” – Ramakrishna Mission Institute of Culture > यह पुस्तक भारत की महान महिलाओं के जीवन और योगदान को रेखांकित करती है। — ️ सरकारी और शैक्षणिक स्रोत (Government & Academic Sources): 5. भारत सरकार की संस्कृति मंत्रालय की वेबसाइट (Ministry of Culture, Government of India)Website: https://www.indiaculture.nic.in 6. IGNOU (Indira Gandhi National Open University) – History & Women Studies Courses > इन पाठ्यक्रमों में अहिल्याबाई के सामाजिक सुधारों और शासन तंत्र पर विस्तृत चर्चा की गई है। 7. Archaeological Survey of India (ASI) – Temples & Heritage Reports > जिन मंदिरों का अहिल्याबाई ने निर्माण या जीर्णोद्धार कराया, उनका ऐतिहासिक विवरण मिलता है। —  ऑनलाइन लेख और जर्नल्स (Online Articles & Journals): 8. Live History India – Article: “The Queen Who Rebuilt Kashi”Link: https://www.livehistoryindia.com 9. The Better India – “Ahilyabai Holkar: The Philosopher Queen Who Built Temples Across India”Link: https://www.thebetterindia.com 10. Scroll.in – Historical Commentary on Ahilyabai’s Rule > विभिन्न लेखों में उनके न्यायप्रिय शासन और सामाजिक दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला गया है। — ️ स्मारक और संस्थान (Monuments & Institutions): 11. Ahilya Fort, Maheshwar (MP Tourism) > आज भी पर्यटक स्थल के रूप में संरक्षित, यह अहिल्याबाई के जीवन और शासन का प्रमाण है। Must read- diwali पर निबंध

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दीपावली पर 1000 शब्दों में निबंध (Essay on diwali )

दीपावली जैसा कि नाम से ही दर्शाता है दीप ज्वालित करने का त्योहार इसके पीछे भी एक कहानी हैं – यह कहानी रामायण की है जहाँ श्री राम, उनकी पत्नी सीता और छोटे भाई लक्ष्मण के साथ 14 वर्षों के लंबे वनवास जो की कैकई माता के द्वारा श्री राम को दिया गया था, जब ये वनवास समाप्त हुआ और श्री राम अपने घर अयोध्या लौटे तो वहाँ की जनता ने उनके आगमन पर हर्षों उलास के साथ सभी अयोध्या नगर के घरों में दीपक जलाकर अपनी खुशी व्यक्त की, मिढाईयां, बनाई, नये वस्त्र पहने, गीत गाये आदि,                          दीपावली हो खिली- खिली                           बच्चों पटाखों की जगह                             चलाओ चरखली!!  तो जैसा कि हम बार बार दीपावली में प्रदूषण को कम करने को बात दोहरा रहे हैं क्योंकि पटाखों के चलते कई बच्चे अपनी आँखों की रोशनी तक खो देते है कुछ विकलांग भी हो जाते है, पटाखे भले कुछ समय के लिए आनन्द देते हों लेकिन पर्यावरण को बहुत नुकसान करते हैं, इसलिए हमे कोशिश करनी चाहिए कि प्रदूषण मुक्त दीपावली मनाई जाए ।  जो की एक सही “दीपावली” कि परिभाषा को दर्शाते हैं।  बिना लक्ष्मी- गणेश पूजन के दीपावली पूर्ण नहीं हो सकती इसलिए आपने देखा हो हम सभी के घरों मे सुबह से लेकर शाम तक साफ सफाई, मिठाइयाँ बनाना, नये कपड़े पहन संध्या काल में पूजन होना, सुख- समृद्धि की प्रभु से पूजन द्वारा आरती करना हमारी संस्कृति का ही हिस्सा बन चुका है।  इसके बाद सभी लोग अपने दोस्त रिश्तेदार आदि से गले मिलकर त्योहार की शुभकामनाएं देते है व मिठाई खिलाते हैं।  महिलाएं रंगोली बनाकर घर को सजाती हैं बच्चे बाहार पटाखे चलाते हैं।    इस त्योहार का आरंभ धनतेरस से होता है जिसमे नये बर्तन या सोने चाँदी की वस्तु की खरीदारी करने के लिए शुभ दिवस माना जाता है।  अगली है छोटी दिवाली जिसमे हम साफ सफाई, मिढाई बनाना आदि।  फिर तीसरे दिन बड़ी दिवाली दिन होता है जिसमे श्री राम अयोध्या लौटे जिसका जश्न मनाया गया।  इसके अगले दिन गोवर्धन पूजा होती है जिसमे मान्यता है की श्री कृष्ण ने एक उँगली पे गोवर्धन पर्वत उठा लिया था  आखिर में भाई दूज भाईयों को तिलक से समाप्त होता है।।                        दीप जलाओ घर सजाओ                        प्रदूषण मुक्त त्योहार मनाओ                      पटाखों से दूरी पर्यावरण                             से कहों सोर्री!!   

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National voters day राष्ट्रीय मतदाता दिवस

भारत में राष्ट्रीय मतदाता दिवस 25 जनवरी को हर वर्ष आयोजित किया जाता है। ताकि सभी नागरिकों का ध्यान मतदान की ओर लाया जा सके व इस विषय की गंभीरता नागरिक समझ सके। national voters day

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