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World Anaesthesia Day: सुरक्षा, डर खत्म करने का अभियान 2025

  विश्व एनेस्थीसिया दिवस हर साल 16 अक्टूबर को मनाया जाता है। यह दिन उन लाखों लोगों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है जिन्हें कभी न कभी सर्जरी या किसी तरह के दर्द निवारण की आवश्यकता पड़ी है।  इस लेख में हम जानेंगे कि बेहोशी की प्रक्रिया (एनेस्थीसिया) क्यों ज़रूरी है, यह कैसे काम करती है, और 2025 के अभियान (Theme) के अनुसार हम अपनी सुरक्षा को कैसे सुनिश्चित कर सकते हैं। १. एनेस्थीसिया (anaesthesia): जीवन रक्षक चिकित्सा विज्ञान एनेस्थीसिया का शाब्दिक अर्थ है “संवेदनहीनता” (अनुभूति का अभाव)। यह वह चिकित्सा विज्ञान है जो मरीज़ों को किसी भी शल्य-क्रिया (surgery) या दर्दनाक प्रक्रिया के दौरान दर्द का एहसास नहीं होने देती। 16 अक्टूबर 1846 को बोस्टन में पहली बार सार्वजनिक रूप से सफल एनेस्थीसिया का प्रदर्शन किया गया था। इस एक खोज ने आधुनिक चिकित्सा जगत को पूरी तरह से बदल दिया और लाखों लोगों का जीवन बचाया। world anaesthesia day 2025 जागरूकता संदेश: “एनेस्थीसिया सिर्फ़ बेहोश करने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह वह विज्ञान है जो मरीज़ को सुरक्षा और दर्द-मुक्त इलाज की गारंटी देता है।” २०२५ का मुख्य विषय: सुरक्षा और रोगी-केंद्रित देखभाल 2025 का वैश्विक अभियान मुख्य रूप से “सुरक्षित एनेस्थीसिया और रोगी-केंद्रित देखभाल” पर केंद्रित है। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि मरीज़ों को शल्य-क्रिया से पहले और बाद में पूरी जानकारी मिले और उनकी देखभाल उनकी व्यक्तिगत ज़रूरतों के हिसाब से हो। २. एनेस्थीसिया के प्रकार: यह प्रक्रिया कैसे काम करती है? एनेस्थीसिया एक ही तरह का नहीं होता। यह मरीज़ की उम्र, स्वास्थ्य की स्थिति, और सर्जरी की जटिलता के आधार पर अलग-अलग तरीक़ों से दिया जाता है। क) सामान्य एनेस्थीसिया (General Anaesthesia) क्या होता है: मरीज़ पूरी तरह से बेहोश हो जाता है और उसे कोई दर्द या एहसास नहीं होता। इस्तेमाल: बड़ी सर्जरी (जैसे हृदय या मस्तिष्क की सर्जरी) के लिए। सुरक्षा: इस दौरान, विशेषज्ञ चिकित्सक मरीज़ की श्वास, हृदय गति और रक्तचाप की लगातार निगरानी करते हैं। (ख) क्षेत्रीय एनेस्थीसिया (Regional Anaesthesia) क्या होता है: शरीर के एक बड़े हिस्से (जैसे कमर से नीचे) को सुन्न (numb) कर दिया जाता है। मरीज़ होश में रह सकता है या उसे हल्की नींद की दवा दी जाती है। इस्तेमाल: सिज़ेरियन डिलीवरी या घुटने की सर्जरी के लिए। जागरूकता: मरीज़ प्रक्रिया के दौरान दर्द महसूस नहीं करता, लेकिन डॉक्टर से बात कर सकता है। (ग) स्थानीय एनेस्थीसिया (Local Anaesthesia) क्या होता है: शरीर के बहुत ही छोटे हिस्से को सुन्न किया जाता है। इस्तेमाल: दाँत निकालने या छोटे टाँके लगाने जैसी मामूली प्रक्रियाओं के लिए। सुरक्षा: इसका प्रभाव जल्दी समाप्त हो जाता है। चिंता का विषय विशेषज्ञ की सलाह (जागरूकता) 1.बेहोश होने का भय   2. दुष्प्रभाव (Side Effects)   3. दर्द का अनुभव 1.विशेषज्ञ आपको जागने के समय और प्रक्रिया के बारे में पहले ही बताते हैं। हर क्षण आपकी श्वास और दिल की धड़कन की निगरानी होती है।   2. ज़्यादातर हल्के दुष्प्रभाव (जैसे हल्की उल्टी या गले में ख़राश) कुछ ही घंटों में समाप्त हो जाते हैं। गंभीर जटिलताएँ बहुत कम आती हैं।   3.एनेस्थीसिया देने से पहले, विशेषज्ञ पूरी जाँच करते हैं ताकि आप प्रक्रिया के दौरान कोई दर्द महसूस न करें। ४. मरीज़ों के लिए आवश्यक जानकारी (२०२५ के विषय पर आधारित) 2025 के अभियान के अनुसार, रोगी को अपनी देखभाल का केंद्र बिंदु बनना चाहिए। मरीज़ को ये तीन चीज़ें ज़रूर करनी चाहिए: (क) अपने विशेषज्ञ से बात करें शल्य-क्रिया से पहले, एनेस्थीसिया विशेषज्ञ से खुल कर बात करें: अपना स्वास्थ्य इतिहास बताएँ: अपनी पिछली बीमारियों (दिल या श्वास से जुड़ी), एलर्जी, और आप जो भी दवाइयाँ ले रहे हैं, उनके बारे में विस्तार से बताएँ। प्रश्नों की सूची बनाएँ: एनेस्थीसिया की प्रक्रिया, उसके प्रकार और रिकवरी के बारे में सवाल ज़रूर पूछें। (ख) उपवास नियमों का पालन करें एनेस्थीसिया से पहले पेट का ख़ाली होना बहुत ज़रूरी है। जागरूकता: चिकित्सक के बताए अनुसार भोजन और पानी पीने की समय-सीमा का सख़्ती से पालन करें। (ग) रिकवरी पर ध्यान दें एनेस्थीसिया के बाद की देखभाल उतनी ही ज़रूरी है जितनी सर्जरी। विशेषज्ञ की सलाह के हिसाब से दवाइयाँ लें और धीरे-धीरे सामान्य जीवन की ओर लौटें।   बाहरी लिंक्स (अतिरिक्त जानकारी के लिए) 1. World Federation of Societies of Anaesthesiologists (WFSA) (यह एनेस्थीसिया के क्षेत्र में सबसे बड़ी अंतर्राष्ट्रीय संस्था है।)https://wfsahq.org/ 2. American Society of Anesthesiologists (ASA) (यह संस्था मरीज़ों की सुरक्षा और एनेस्थीसिया के मानक तय करती है।)https://www.asahq.org/ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs) 1. विश्व एनेस्थीसिया दिवस २०२५ का मुख्य विषय (Theme) क्या है? 2025 का वैश्विक अभियान मुख्य रूप से “सुरक्षित एनेस्थीसिया और रोगी-केंद्रित देखभाल” पर केंद्रित है। 2. एनेस्थीसिया विशेषज्ञ (Anaesthesiologist) कौन होता है? यह एक प्रशिक्षित मेडिकल डॉक्टर होता है जो सर्जरी से पहले, दौरान और बाद में मरीज़ की देखभाल करता है। वे दर्द से राहत देने और मरीज़ के जीवन-संकेतों (साँस, हृदय गति आदि) पर नियंत्रण रखने के विशेषज्ञ होते हैं। 3. क्या एनेस्थीसिया से मेरी याददाश्त जा सकती है? ज़्यादातर मामलों में, याददाश्त स्थायी रूप से नहीं जाती है। सर्जरी के बाद थोड़ा भ्रम या हल्की याददाश्त की कमी हो सकती है जो कुछ ही घंटों में ठीक हो जाती है। 4. एनेस्थीसिया के दुष्प्रभाव ख़तरनाक होते हैं? गंभीर दुष्प्रभाव बहुत कम होते हैं। सामान्य दुष्प्रभावों में हल्की मतली या गले में ख़राश शामिल हैं, जो अस्थायी होते हैं। 5. एनेस्थीसिया का प्रभाव कितने समय तक रहता है? यह एनेस्थीसिया के प्रकार पर निर्भर करता है। स्थानीय एनेस्थीसिया (Local) का प्रभाव कुछ घंटों में खत्म हो जाता है, जबकि सामान्य एनेस्थीसिया (General) का प्रभाव ऑपरेशन खत्म होते ही हटा दिया जाता है। दवा का असर पूरी तरह से खत्म होने में कुछ और घंटे लग सकते हैं। 6. क्या एनेस्थीसिया देने से पहले किसी ख़ास टेस्ट की ज़रूरत होती है? हाँ। एनेस्थीसिया विशेषज्ञ (Anaesthesiologist) हमेशा आपकी पूरी स्वास्थ्य प्रोफ़ाइल की जाँच करते हैं। इसमें रक्तचाप (blood pressure), शुगर लेवल और हृदय गति (heart rate) की जाँच शामिल है। यह जाँच यह सुनिश्चित करती है कि आपके शरीर के लिए कौन-सी एनेस्थीसिया सबसे सुरक्षित है। 7. क्या एनेस्थीसिया के बाद तुरंत गाड़ी चलाना सुरक्षित है? नहीं, एनेस्थीसिया के बाद तुरंत गाड़ी चलाना सुरक्षित नहीं है। दवा का असर ख़त्म होने

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Vijayadashmi 1024x724

दसरा ,दशहरा, विजयदशमी क्या सब 1 हैं निबंध में जानें

दसरा ,दशहरा या विजयदशमी क्या सब एक हैं निबंध में जानें विजयादशमी, जिसे हम दशहरा या दसारा के नाम से भी जानते हैं, विजयादशमी का पर्व कई नामों से जाना जाता है, लेकिन इन सबका मूल अर्थ एक ही है: विजय का दसवां दिन।’ १ . दशहरा – उत्तर व् मध्यभारत में मनाया जाता है , पीछे की कथा – दस सिरों वाले रावण को हराया था व उसपे विजय प्राप्त की।  २ . विजयादशमी – पूरे भारत में मनाया जाता है। पीछे की कथा -माँ दुर्गा द्वारा महिषासुर पर अंतिम विजय और शुभ कार्यों की शुरुआत। ३ . दसारा (Dasara)– कर्नाटक (मैसूर) में मनाया जाता है पीछे का कारण – यह शक्ति की देवी की पूजा पर केंद्रित एक भव्य उत्सव होता है।  यह पर्व सिर्फ़ एक दिन का उत्सव नहीं है, बल्कि यह नौ दिनों तक चलने वाले नवरात्रि उत्सव की पूर्णता है।        ”  है जगत जननी , है काल रात्रि , है कुशमुण्डा ,                            तो है कभी गौरी , है नौ देवी , है तभी तो                                                             विजय दशमी।  “ १ . माँ दुर्गा और महिषासुर की कथा- शक्ति की विजय: नौ दिनों तक महिषासुर नामक राक्षस से भीषण युद्ध करने के बाद, माँ दुर्गा ने दसवें दिन उसका वध कर दिया। इसलिए, इन नौ रातों को नवरात्रि कहा जाता है और दसवें दिन को विजयादशमी, क्योंकि यह शक्ति की जीत का दिन है।  २ . राम और रावण की कथा-  राम ने दस सिर वाले राक्षस रावण का वध करके उस पर विजय प्राप्त की थी इस विजय में भी उन्हें बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ा , और बहुत समय व संघर्ष के बाद विजय हांसिल कर वे अयोध्या प्रस्थान कर पाए।  इस दिवस के २० दिनों पश्चात उनके आगमन में द्वीप प्रज्वलित कर अपनी ख़ुशी राज्य के लोगों ने जताई जिस पर्व को हम दीपावली के नाम से जानते है।  विजयादशमी का महत्व: सफलता और नई शुरुआत का प्रेरक संदेश विजयादशमी हमें एक बहुत ही सकारात्मक और शक्तिशाली संदेश देती है, जो आपके व्यक्तिगत जीवन और करियर के लिए बेहद ज़रूरी है।यह सिर्फ़ एक छुट्टी का दिन नहीं है, बल्कि यह वह दिन है जब हमें यह याद दिलाया जाता है कि जीवन में कितनी भी चुनौतियाँ क्यों न हों, अंत में हमेशा सत्य और अच्छाई की जीत होती है। यह पर्व हर छात्र और हर नागरिक के लिए प्रेरणा का एक महान स्रोत है। रावण दहन सिर्फ़ एक पुतला जलाना नहीं है। यह आपके अंदर की बुराइयों को ख़त्म करने का संकल्प है: क्रोध और अहंकार का दहन: इस दिन हमें संकल्प लेना चाहिए कि हम अपने अहंकार, आलस्य और क्रोध जैसी बुरी आदतों को छोड़ दें। सत्य के मार्ग पर चलना: विजयादशमी हमें याद दिलाती है कि संघर्ष चाहे कितना भी बड़ा हो, हमें हमेशा सच्चाई और ईमानदारी के रास्ते पर ही चलना चाहिए।  “जिस दिन हम अपनी बुरी आदतों को ख़त्म कर देते हैं, वही हमारे लिए असली विजयादशमी है।” विभिन्न क्षेत्रों में उत्सव विजयादशमी को पूरे भारत में अलग-अलग, लेकिन उत्साहपूर्ण तरीक़ों से मनाया जाता है, जो इसकी सांस्कृतिक विविधता को दर्शाते हैं। रामलीला: उत्तर भारत में, इस विजय को दस दिनों तक चलने वाली रामलीला के माध्यम से जीवंत किया जाता है। आख़िरी दिन, विशाल रावण, मेघनाद और कुम्भकर्ण के पुतलों का दहन किया जाता है, जो हमारे अंदर की बुराइयों को ख़त्म करने का प्रतीक है। मेला: जगह-जगह मेले लगते हैं, जहाँ लोग इकट्ठा होते हैं और इस उत्सव का आनंद लेते हैं। सिंदूर खेला (Sindoor Khela): पश्चिम बंगाल और असम में, विजयादशमी के दिन महिलाएँ माँ दुर्गा को सिंदूर लगाती हैं और एक-दूसरे को भी सिंदूर लगाती हैं। जीवन में प्रेरणा: सफलता का मार्ग विजयादशमी का पर्व सिर्फ़ अतीत की विजय नहीं है, बल्कि यह भविष्य की सफलता के लिए प्रेरणा है। लक्ष्य पर ध्यान (Focus on Goal): भगवान राम ने अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित किया था। हमें भी अपने करियर और जीवन के लक्ष्यों पर अटल रहना चाहिए। कठिनाइयों से लड़ना (Facing Challenges): माँ दुर्गा ने नौ दिनों तक लगातार युद्ध किया। यह हमें सिखाता है कि सफलता रातों-रात नहीं मिलती, बल्कि निरंतर प्रयास (continuous effort) और दृढ़ संकल्प (determination) से मिलती है। सकारात्मकता को अपनाना: इस दिन हमें अपने अंदर से नकारात्मकता को जला देना चाहिए और एक सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ हर काम को शुरू करना चाहिए। संस्कृत श्लोक (प्रेरणा): “यत्र धर्मः तत्र जयः।” (अर्थ: जहाँ धर्म है, वहीं जीत है।) दशहरा हमें याद दिलाता है कि हमारा धर्म सत्य, निष्ठा और मेहनत है, और इन्हीं से हमें जीवन में विजय प्राप्त होगी। अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs) 1. विजयादशमी 2025 की सही तारीख़ क्या है? 2025 में विजयादशमी (दशहरा) अक्टूबर महीने की 11 तारीख, शनिवार को मनाया जाएगा। 2. विजयादशमी पर कौन से काम करना शुभ माना जाता है? इस दिन नया काम, नई पढ़ाई, या नई मशीन ख़रीदना बहुत शुभ माना जाता है। वाहन, औज़ार, और किताबों की पूजा करना भी इस दिन की एक महत्वपूर्ण परंपरा है। 3. विजयादशमी का महत्त्व क्या है? इसका महत्त्व दो बातों में है: बुराई पर अच्छाई की विजय (राम-रावण की कथा) और शक्ति की जीत (माँ दुर्गा द्वारा महिषासुर का वध)। यह दिन हमें जीवन में नया संकल्प लेने के लिए प्रेरित करता है। 4. क्या विजयादशमी और दशहरा एक ही हैं? हाँ, विजयादशमी और दशहरा एक ही त्योहार के अलग-अलग नाम हैं। विजयादशमी नाम ज़्यादा औपचारिक है और यह विशेष रूप से विजय के दसवें दिन को दर्शाता है। 5. छात्र इस दिन का इस्तेमाल अपनी सफलता के लिए कैसे कर सकते हैं? छात्र इस दिन अपनी किताबों और कलमों की पूजा (सरस्वती पूजा के रूप में) करके अपनी पढ़ाई की शुरुआत कर सकते हैं। उन्हें यह संकल्प लेना चाहिए कि वे अपने आलस्य (laziness) पर विजय प्राप्त करेंगे और अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करेंगे।   दशहरा कैसे मनाया जाता है? पूरे भारत में दशहरा को

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दुर्गा देवी सदा रक्षतु सर्वमङ्गलदायिनी। 20250929 195110 0000 1024x724

Navratri Wishes in Sanskrit: अर्थ सहित शुभकामनाएँ और संदेश

Navratri Wishes in Sanskrit: अर्थ सहित शुभकामनाएँ और संदेश Navratri Wishes in Sanskrit: अर्थ सहित शुभकामनाएँ और संदेश नवरात्रि नौ देवियों की महिषासुर पर विजय को दर्शाने का त्यौहार है, हर देवी की अपनी अलग शक्ति, व विशेषता है, जैसे हमारी पहली देवी है – शैलपुत्री ( संस्कृतेन नवरात्रि अभिवादनानि पठन्तु!नवरात्रिः नवदेव्याः महिषासुरस्य राक्षसस्य उपरि विजयस्य उत्सवः अस्ति । प्रत्येकदेव्याः स्वकीया विशिष्टा शक्तिविशेषता च भवति, अस्माकं प्रथमा देवी शैलपुत्री इव।  )  इनको हम पर्वत की बेटी के नाम से जानते हैं। क्योंकि वेदों की जानकारी के अनुसार इनका जन्म पर्वतराज हिमालय के घर पर हुआ था । ( वयं तां गिरिपुत्रीं जानीमः यतो हि वेदानुसारं पर्वतराजस्य हिमालयस्य गृहे जातः ।)  दूसरी देवी हैं – ब्रह्मचारिणी , जिन्होंने अपनी कठोर तपस्या द्वारा भगवान शिव को अपने पति के रूप में प्राप्त किया । ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और चारिणी यानी आचरण करने वाली तो जो तपस्या का आचरण करती है उनको कहा गया ब्रह्मचारिणी । (द्वितीया देवी ब्रह्मचारिणी अस्ति, या कठोरतपस्येन भगवन्तं शिवं पतिं प्राप्तवती। ब्रह्मा तपः इत्यर्थः, चारिणी च अभ्यासकर्तृ इत्यर्थः, अतः तपस्यां कुर्वन्तः ब्रह्मचारिणी इति उच्यन्ते।)  तीसरी देवी का नाम है चंद्रघंटा ,जो कि अपने मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र धारण किये हैं, जिसके कारण उन्हें चंद्रघंटा भी कहा जाता है. ( तृतीयदेव्याः नाम चन्द्रघण्टा, या शिरसि घण्टाकारं अर्धचन्द्रं धारयति, यस्मात् कारणात् सा चन्द्रघण्टा इति अपि उच्यते ।)  चौथे स्थान की देवी है, कूष्माण्डा देवी। कुष्मांडा अष्टभुजा से युक्त हैं। इसलिए इन्हें देवी अष्टभुजा के नाम से भी जाना जाता है। जब सृष्टि नहीं थी, चारों तरफ अंधकार ही अंधकार था, तब इसी देवी ने अपने ईषत्‌ हास्य से ब्रह्मांड की रचना की थी। इसीलिए इसे सृष्टि की आदिस्वरूपा या आदिशक्ति कहा गया है (चतुर्थस्थानस्था देवी कूष्माण्डा देवी अस्ति। सा अष्टभुजासंयुक्ता अस्ति, अतः एव तां ‘अष्टभुजा देवी’ इति अपि प्रसिद्धा। यदा सृष्टिः नासीत्, सर्वत्र अन्धकारः एव आसीत्, तदा अस्याः ईषत् हास्येन एव ब्रह्माण्डस्य रचना अभवत्। अतः एव एषा देवी सृष्टेः आदिस्वरूपा अथवा आदिशक्तिः इति कथ्यते।)  कार्तिकेय को जन्म देने के कारण ही, मां दुर्गा के इस स्वरूप को ‘स्कंद की माता’ या स्कंदमाता कहा जाता है।स्कंदमाता की गोद में बालक स्कंद बैठे होते हैं। ( पञ्चमे स्थाने या देवी विराजते सा स्कन्दमाता देवी इति ख्याताऽस्ति। कार्तिकेयस्य जन्मदायिन्या रूपेणैव देवी दुर्गायाः एषः स्वरूपः ‘स्कन्दमाता’ इति प्रसिद्धः। स्कन्दमातायाः गोदस्यां बालः स्कन्दः उपविष्टः दृश्यते।)   छंटवी देवी हैं – कात्यायनी देवी । सातवी देवी – कालरात्री – माँ का स्वरूप अंधेरे की तरह काले रंग को दर्शाता है इसलिए काल रात्रि कहते है, आठवीं देवी -महा गौरी और नवीं देवी – सिद्दीदात्रि देवी, प्रत्येक दिन नवरात्रि में एक विशेष देवी की पूजा की जाती है. ( षष्ठी देवी कात्यायनी देवी अस्ति।सप्तमी देवी कालरात्रिः — अस्याः स्वरूपः अन्धकारवत् कृष्णवर्णं दर्शयति, अतः तां ‘कालरात्रिः’ इति कथ्यते।अष्टमी देवी महागौरी।नवमी देवी सिद्धिदात्री देवी। नवरात्रोत्सवे प्रतिदिनं विशेषा देवी पूज्य)ते। नवरात्रि 2025 : सामान्य प्रश्नोत्तर (FAQ) प्रश्न 1. नवरात्रि 2025 कब से कब तक मनाई जाएगी?  नवरात्रि 2025 का आरंभ 22 सितंबर 2025 (सोमवार) से होगा और इसका समापन 30 सितंबर 2025 (मंगलवार) को होगा। प्रश्न 2. नवरात्रि क्यों मनाई जाती है? नवरात्रि देवी दुर्गा और उनके नौ स्वरूपों की पूजा का पर्व है। यह उत्सव असत्य पर सत्य की, अन्याय पर न्याय की तथा बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। प्रश्न 3. नवरात्रि में कितने स्वरूपों की पूजा होती है? नवरात्रि में माँ दुर्गा के नौ रूपों – शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चन्द्रघण्टा, कूष्माण्डा, स्कन्दमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री – की पूजा की जाती है। प्रश्न 4. नवरात्रि में व्रत रखने का क्या महत्व है? व्रत रखने से मन शुद्ध होता है, आत्मबल बढ़ता है और साधक को आध्यात्मिक शक्ति की अनुभूति होती है। प्रश्न 5. नवरात्रि में कौन-से रंग शुभ माने जाते हैं? प्रत्येक दिन के लिए एक विशेष रंग शुभ माना जाता है। जैसे – पहले दिन पीला, दूसरे दिन हरा, तीसरे दिन ग्रे, चौथे दिन नारंगी, पाँचवें दिन सफेद, छठे दिन लाल, सातवें दिन नीला, आठवें दिन गुलाबी और नौवें दिन बैंगनी रंग। प्रश्न 6. नवरात्रि में घटस्थापना का क्या महत्व है? घटस्थापना को सृष्टि की शुरुआत और शक्ति की उपस्थिति का प्रतीक माना जाता है। कलश में स्थापित जल, देवी के जीवनदायी स्वरूप का द्योतक है। प्रश्न 7. नवरात्रि में कन्या पूजन कब और क्यों किया जाता है?  नवरात्रि के अष्टमी या नवमी तिथि को कन्या पूजन किया जाता है। यह पूजा माँ दुर्गा के बाल रूप की आराधना है और इसे शुभ एवं फलदायी माना जाता है। प्रश्न 8. नवरात्रि में जगराता या गरबा क्यों होता है? यह देवी की भक्ति और आनंद का सामूहिक रूप है। जगराता भजन-कीर्तन से भक्ति को गहराता है, जबकि गरबा और डांडिया माँ शक्ति के उत्सव का सांस्कृतिक प्रतीक है। प्रश्न 9. नवरात्रि में क्या नहीं करना चाहिए?  इस समय मद्यपान, मांसाहार, क्रोध, झूठ और आलस्य से दूर रहना चाहिए। यह साधना और आत्मसंयम का पर्व है। प्रश्न 10. नवरात्रि का आध्यात्मिक संदेश क्या है? नवरात्रि यह संदेश देती है कि जब हम भीतर की नकारात्मकता को हराते हैं, तब जीवन में शांति, शक्ति और सफलता प्राप्त होती है। v नवरात्रि सम्बन्धी प्रश्नोत्तरः (FAQ) प्रश्न 1: नवरात्रोत्सवः कदा भवति? उत्तरः: नवरात्रोत्सवः आश्वयुज-मासे शुक्ल-पक्षे प्रतिवर्षं सम्पद्यते। प्रश्न 2: नवरात्रि उत्सवः कियत्-दिनानि भवति?उत्तरः: एषः उत्सवः नव-दिनानि यावत् भवति, अतः “नवरात्रि” इति नाम अस्ति। प्रश्न 3: एतेषु नवसु दिनेṣu केषां देवीरूपाणि पूज्यन्ते?उत्तरः: शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चन्द्रघण्टा, कूष्माण्डा, स्कन्दमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री—एते नवदुर्गारूपाणि पूज्यन्ते। प्रश्न 4: नवरात्रे किमर्थं देवी-पूजा क्रियते?उत्तरः: नवरात्रे दुर्गादेवीरूपेण शक्तेः आराधना क्रियते यतः सा धर्मस्य संरक्षणं, अधर्मस्य नाशं च करोति। प्रश्न 5: नवरात्र्याः सांस्कृतिकं महत्वं किम्?उत्तरः: नवरात्रि केवलं धार्मिकः उत्सवः नास्ति, अपि तु सांस्कृतिक-समरस्यानां, नृत्यगीत-कलानां च उत्सवः अपि अस्ति। प्रश्न 6: नवरात्रौ केन प्रकारेण उपवासः क्रियते?उत्तरः: नवरात्रौ भक्ताः फलाहारं सेवन्ते, अनशनं वा कुर्वन्ति, तथा च नियमेन ध्यान-जप-पूजनानि अपि योजयन्ति। प्रश्न 7: अयं उत्सवः भारतस्य केवलं कस्यचित् प्रदेशे एव आचर्यते वा सर्वत्र?उत्तरः: अयं उत्सवः सर्वत्र भारतदेशे विविधरूपेण आचर्यते—गुजराते “गरबा”, पश्चिमबङ्गे “दुर्गा-पूजा”, अन्येषु स्थलेषु हवन-पूजनादिना। प्रश्न 8: नवरात्रे दशमदिनं किम् उच्यते?उत्तरः: दशमदिनं “विजयादशमी” अथवा “दशहरा” इति उच्यते, यस्मिन् दिवसे भगवान् रामः रावणं विजित्य धर्म-जयः अभवत्। —Navratri Wishes in Sanskrit: अर्थ सहित शुभकामनाएँ और संदेश https://www.artofliving.org/in-hi/navratri/nav-durga-the-nine-forms-of-durga-devi

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Happy Daughters day 2025 : best wishes digital cards

Happy Daughters Day 2025 : digital cards, templates, cards.. Happy daughters day 2025, cards templates, digital art, customized art, give best wishes to your daughter with these cards showing your love and care. National daughters day falls on 28 th September 2025, cae to remember the importance of our daughters, how much they are important as equal to our sons.   https://www.ndtv.com/offbeat/national-daughters-day-2025-wishes-messages-and-quotes-to-celebrate-love-and-pride-9354343

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पोषण पखवाड़ा 2025 1024x724

पोषण अभियान : 2025 भारत का पोषण अभियान आपका योगदान

पोषण पखवाड़ा: 2025 भारत का पोषण अभियान आपका योगदान पोषण पखवाड़ा क्या है ? –पोषण अभियान पोषण पखवाड़ा: 2025 भारत का पोषण अभियान आपका योगदान- भारत में पोषण और स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए हर साल पोषण पखवाड़ा मनाया जाता है यह एक जन आंदोलन भी है जिसका उद्देश्य सबको बच्चों ,  महिलाओं , धात्रिमताओं , का पोषण पर ध्यान लाना भी है क्यूंकि ये सभी वह समूह हैं जिनको सबसे ज्यादा सही पोषण की उनके शरीर द्वारा मांग रहती है किंतु कम जानकारी या जानकारी के अभाव में , व आर्थिक व्यवस्था आदि भी पोषण में कमी के मुख्य कारणों में से एक हैं।  इसी समस्या पर काम करने व् बच्चों और महिलाओं का  स्वास्थ्य सुधारने के काम के लिए भारत सरकार के ‘पोषण अभियान’ (National Nutrition Mission) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसे 2018 में शुरू किया गया था। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं में पोषण के स्तर में सुधार लाना था। यह एक 15 दिनों का कार्यक्रम है जो भारत में पोषण की कमी और कुपोषण जैसी समस्याओं से लड़ने के लिए शुरू किया गया है। पोषण पखवाड़ा का महत्व: यह क्यों ज़रूरी है? यह कार्यक्रम लोगों को यह सिखाता है कि स्वस्थ रहने के लिए महंगे भोजन की ज़रूरत नहीं है, बल्कि स्थानीय रूप से उपलब्ध और मौसमी फल और सब्ज़ियाँ ही सबसे ज़्यादा पौष्टिक होती हैं। पोषण पखवाड़ा का महत्व सिर्फ़ सही भोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वच्छता से भी जुड़ा है। यह कार्यक्रम साफ़-सफ़ाई के महत्व पर भी ज़ोर देता है, क्योंकि गंदगी से होने वाली बीमारियाँ भी कुपोषण का कारण बनती हैं। पोषण पखवाड़ा सिर्फ़ एक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि एक स्वस्थ राष्ट्र की नींव है। इसके कई महत्वपूर्ण उद्देश्य हैं: जागरूकता बढ़ाना: यह लोगों को संतुलित आहार (balanced diet), स्वच्छता (hygiene  ), और पोषण(nutrition  )  के महत्व के बारे में जागरूक करता है। सही जानकारी के बिना, लोग अक्सर ग़लत खान-पान के तरीक़े अपनाते हैं। कुपोषण से लड़ना: भारत में आज भी कुपोषण एक बड़ी समस्या है। पोषण पखवाड़ा इस समस्या को जड़ से ख़त्म करने के लिए सरकार और जनता को एक साथ लाता है। स्थानीय और मौसमी भोजन को बढ़ावा देना: यह कार्यक्रम लोगों को यह सिखाता है कि स्वस्थ रहने के लिए महंगे भोजन की ज़रूरत नहीं है, बल्कि स्थानीय रूप से उपलब्ध और मौसमी फल और सब्ज़ियाँ ही सबसे ज़्यादा पौष्टिक होती हैं। स्वच्छता का महत्व: पोषण सिर्फ़ सही भोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वच्छता से भी जुड़ा है। यह कार्यक्रम साफ़-सफ़ाई के महत्व पर भी ज़ोर देता है, क्योंकि गंदगी से होने वाली बीमारियाँ भी कुपोषण का कारण बनती हैं। पोषण पखवाड़ा के मुख्य विषय (Themes) हर साल, पोषण पखवाड़ा एक नए विषय (theme) पर केंद्रित होता है। ये विषय समाज के सबसे ज़रूरी पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं: पौष्टिक आहार: सही और पौष्टिक आहार को पहचानना और उसे अपनी डाइट में शामिल करना। स्वच्छता: साफ़-सफ़ाई और सही तरीक़े से हाथ धोना। बच्चों का स्वास्थ्य: छोटे बच्चों के सही विकास के लिए पोषण का महत्व। आप पोषण पखवाड़ा का हिस्सा कैसे बन सकते हैं? पोषण पखवाड़ा एक जन आंदोलन है, और इसमें हर नागरिक योगदान दे सकता है। जागरूकता फैलाएं: आप अपने दोस्तों और परिवार के साथ पोषण से जुड़ी जानकारी साझा कर सकते हैं। पौष्टिक भोजन अपनाएं: अपनी डाइट में पौष्टिक भोजन को शामिल करें और बच्चों को भी इसके बारे में सिखाएं। साफ़-सफ़ाई रखें: अपने घर और आस-पास की जगहों को साफ़ रखें। पोषण पखवाड़ा: 2025 भारत का पोषण अभियान आपका योगदान निष्कर्ष: स्वस्थ जीवन की ओर एक सकारात्मक कदम पोषण पखवाड़ा भारत को एक स्वस्थ और सशक्त राष्ट्र बनाने की दिशा में एक बहुत ही सकारात्मक और महत्वपूर्ण कदम है। यह हमें सिखाता है कि पोषण और स्वास्थ्य सिर्फ़ सरकार की ज़िम्मेदारी नहीं, बल्कि हम सबकी सामूहिक ज़िम्मेदारी है। अगर हम सब मिलकर इस अभियान का हिस्सा बनें, तो हम कुपोषण को ख़त्म कर सकते हैं और एक स्वस्थ भारत का निर्माण कर सकते हैं। FAQs for पोषण पखवाड़ा  1 . पोषण पखवाड़ा कब मनाया जाता है ?   उत्तर –   राष्ट्रीय पोषण माह हर साल सितंबर में मनाया जाता है, जो पोषण पखवाड़ा से अलग है।    पोषण पखवाड़ा और राष्ट्रीय पोषण माह में अंतर पोषण पखवाड़ा (Poshan Pakhwada): कब: यह हर साल मार्च या अप्रैल में मनाया जाता है। कितने दिन: यह एक 15 दिनों का कार्यक्रम है। क्यों: इसका मुख्य उद्देश्य पोषण और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। राष्ट्रीय पोषण माह (Rashtriya Poshan Maah): कब: यह हर साल सितंबर के महीने में मनाया जाता है। कितने दिन: यह पूरे एक महीने का कार्यक्रम है। क्यों: इसका उद्देश्य भी पोषण और कुपोषण की समस्या से लड़ना है, लेकिन यह एक बड़ा और महीने भर चलने वाला अभियान है। 2.  पोषण पखवाड़ा के मुख्य उद्देश्य क्या है ?  उत्तर –  जागरूकता बढ़ाना: यह लोगों को संतुलित आहार (balanced diet), स्वच्छता, और पोषण के महत्व के बारे में जागरूक करता है। सही जानकारी के बिना, लोग अक्सर ग़लत खान-पान के तरीक़े अपनाते हैं। कुपोषण से लड़ना: भारत में आज भी कुपोषण एक बड़ी समस्या है। पोषण पखवाड़ा इस समस्या को जड़ से ख़त्म करने के लिए सरकार और जनता को एक साथ लाता है। स्थानीय और मौसमी भोजन को बढ़ावा देना: यह कार्यक्रम लोगों को यह सिखाता है कि स्वस्थ रहने के लिए महंगे भोजन की ज़रूरत नहीं है, बल्कि स्थानीय रूप से उपलब्ध और मौसमी फल और सब्ज़ियाँ ही सबसे ज़्यादा पौष्टिक होती हैं। स्वच्छता का महत्व: पोषण सिर्फ़ सही भोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वच्छता से भी जुड़ा है। यह कार्यक्रम साफ़-सफ़ाई के महत्व पर भी ज़ोर देता है, क्योंकि गंदगी से होने वाली बीमारियाँ भी कुपोषण का कारण बनती हैं। सामुदायिक भागीदारी: पोषण पखवाड़ा एक जन आंदोलन है, जिसका उद्देश्य हर नागरिक को इसका हिस्सा बनाना है। 3. पोषण पखवाड़ा का मुख्य लक्ष्य क्या है? उत्तर -इस कार्यक्रम का मुख्य लक्ष्य बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं के स्वास्थ्य में सुधार लाना है। इसका उद्देश्य लोगों को संतुलित आहार, स्वच्छता, और स्वास्थ्य के महत्व के बारे में जागरूक करना है ताकि कुपोषण की समस्या को

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7 Essential Tips for the CBSE Formal Letter Format Success! cbse

7 Essential Tips for the CBSE Formal Letter Format Success! cbse Applcation Format for cbse school and college students CBSE Formal letter format Class 10 ,12,college students This format is standard for cbse and can be used for all formal letters such as application for the school principal or college principal, letter to the editor or any official request. Effective Beginning for a Letter in CBSE Format The beginning of a formal letter is crucial for making a strong first impression in letter writing. A well-structured opening, as per the CBSE format, immediately communicates professionalism and respect. This is the foundation upon which the entire letter is built, and it’s an essential skill for students in both school and college. The initial part of letter writing involves four key components. First, you must write the sender’s address at the top left. This should be your full address, written clearly in 2-3 lines. Directly below this, you write the date, which is a vital part of the CBSE format. After the date, you must include the receiver’s address, which includes the designation and full address of the person you are writing to. This attention to detail is a hallmark of good letter writing. Finally, the subject line is the most critical element of the beginning of your letter. It should be a concise, one-line summary of the letter’s purpose, ensuring the reader understands the reason for the letter writing immediately. For example, “Subject: Leave application for three days.” Mastering this CBSE format for the beginning of a letter is a fundamental skill for successful letter writing in academic and professional life. by following it correctly you can better perform in exams. 1.Sender’s Address: this is your address .It should be written in 3 lines. Example- 24, Gandhi Nagar                      Indore – 452001                      Madhya Pradesh 2. Date: Write the date on which you are writing the letter. Example: September 23, 2025 3. Receiver’s Address:3. This is the address of the person you are writing to. Include their designation. Example: The Principal Modern Public School Indore – 452001 4. Subject: This is the main purpose of your letter. It should be a short, single-line summary. Example: Subject: Leave application for three days 5. Salutation: This is your respectful greeting. Example: Dear Sir/Madam 6. Body: The body of the letter is where you write your message in 2-3 paragraphs. * Paragraph 1: Introduce yourself and state the purpose of your letter. * Paragraph 2: Provide details and give the reason for your request. * Paragraph 3: Express your gratitude and make a polite request for a quick response. 7. Complimentary Close: A polite way to end the letter. Example: Yours obediently, 8. Name & Signature: Your full name and signature. Example: (Your Signature) (Your Full Name) Effective Ending for a Letter in CBSE Format In letter writing, a professional and respectful closing is just as important as the content itself. A strong ending leaves a positive lasting impression and demonstrates that you have followed the correct CBSE format. This final part of your letter writing should bring your message to a polite close while reinforcing your main request. According to the CBSE format, the closing should be placed on the left side of the page, directly after the body of the letter. You can start by expressing gratitude for the reader’s time with a phrase like, “Thank you for your kind consideration.” Following this, you must use a formal closing phrase. For school students, “Yours obediently” is the standard, while college students and professionals typically use “Yours sincerely” or “Yours faithfully.” This distinction is a key element of effective letter writing within the CBSE format. Finally, you should sign your name and provide your full name in a clear, readable manner. This simple act of closing your letter writing correctly shows respect and professionalism. Mastering this part of letter writing is crucial for scoring well in examinations and for making a good impression in any formal communication. CBSE Leave application for sick leave (Sender’s Address) (date) The Principal (School name) (School Address) Subject: application for sick leave Dear Sir/ Madam,                   I am writing to request a two-day leave of absence from school. I will be unable to attend classes on [Start Date] and [End Date] due to a high fever. I have been advised by a doctor to take rest and will not be able to attend school during this time. I will catch up on all the missed lessons and homework once I return. Thank you for your kind consideration. Yours obediently,[Your Name][Class and Section][Roll Number] CBSE Leave application from parents (Parent’s Address) (Date) The principal (School Name) (School Address) Subject: Leave application for [Child’s Name] Dear Sir/Madam, My son/daughter, [Child’s Name], studying in class [Class and Section] with Roll No. [Roll Number], will not be able to attend school from [Start Date] to [End Date]. We have a family function to attend out of town during these dates. We request you to kindly grant him/her leave for these three days. We assure you that my child will complete all pending work and will catch up on the lessons as soon as they return. Thank you for your consideration. Yours sincerely, (Parent’s Name)  (Parent’s Signature) CBSE Application for 3 days (school/college) (Your Address) (Date) The Principal /Dean (School/College Name) (School Address) Subject: Leave application for three days Dear Sir/Madam, I am a student of [Your Course/Class] and my Roll Number is [Roll Number]. I would like to request a three-day leave of absence from [Start Date] to [End Date]. I have to travel out of the city for a personal matter, and I will be unable to attend my classes during this period. I have already informed my teachers about this absence and will ensure that all coursework is completed. I would be grateful if you could

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आयुध पूजा 2025 : सफलता,और काम का शानदार त्योहार

आयुध पूजा : इतिहास , महत्व और रौचक तथ्य आयुध पूजा 2025 : काम के सम्मान का त्यौहार है – जैसा की हम सभी कहते रहते हैं –  “काम से ही हमारी रोज़ी रोटी होती है,  काम से ही हमारी जीवन ज्योति होती है। “ तो कहने का भाव है की काम से ही हमारा जीवन यापन होता है ,  हमारा सारा घर संसार , छोटी छोटी ज़रूरतों से लेकर बड़े बड़े ख्वाब सब हमारे काम की कमाई से ही तो पूरे होते हैं।  इसलिए एक पुरानी कहावत है “काम ही पूजा है ” इस चीज़ के महत्व को मनाने वाला त्यौहार है आयुध पूजा।  यह त्यौहार हर उस उपकरण जैसे ज्ञान और मेहनत का सम्मान है न की सिर्फ हत्यारों और औज़ारों की पूजा। यह वो साड़ी चीजें है जो हमारे जीवन और काम में हमारी सहायता करते हैं।  आयुध पूजा 2025-का एतिहासिक और पौराणिक महत्व  इस त्यौहार को एक कहानी द्वारा समझा जा सकता है , जिससे हम यह सीखते हैं की अच्छाई की जीत में काम व शक्ति का सही प्रयोग सबसे ज़्यादा ज़रूरी है।   देवी दुर्गा की विजय महिषासुर के ऊपर  आयुध पूजा का महत्व नवरात्री के त्यौहार से है पौराणिक कथाओं में बताया गया है की एक महिषासुर नाम का एक ताकतवर , बलशाली राक्षस था जिसने देवताओं को परेशान कर रखा था। उसे हारने के लिए सभी देवताओं ने अपनी शक्तियां मिलकर देवी दुर्गा को बनाया। देवी दुर्गा ने दस दिनों तक महिषासुर से युद्ध किया और नवमी के दिन वह पराजित हुआ! इस युद्ध में जिन हथियारों को इस्तेमाल कर के देवताओं द्वारा दिए गए थे।  युद्ध के बाद उन्होंने उन सभी हथियारों और औजारों को शुद्ध किया और उनकी पूजा की।  इसलिए आयुध पूजा मनाई जाती है।  आयुध पूजा का गहरा अर्थ व महत्त्व  काम और मेहनत का सम्मान ;   – जैसे एक किसान के लिए -हल , ट्रेक्टर  -इंजीनियर के लिए – कम्प्यूटर , लैपटॉप  -शिक्षक के लिए – उसकी किताबें , पेन इन सभी औजारों की पूजा।  इस त्योहार का मकसद उन उपकरणों को धन्यवाद देना है जो हमारी सफलता के पीछे की ताकत है.  आयुध पूजा 2025 के रोचक तथ्य  -विभिन्न जगहों पर :  आयुध पूजा अलग अलग नामों द्वारा जाना जाता है , दक्षिण भारत में इसे “अस्त्र पूजा ” कहते है  -अलग अलग व्यवसाय : इस पर्व को योद्धा या किसान ही नहीं मनाते बल्कि इसे कलाकार अपने ब्रशेज़ और कैनवास की पूजा करके ,  और संगीतकार अपने संगीत के औज़ार  जैसे हारमोनियम , सितार आदि।  -शमी वृक्ष का बहुत महत्त्व इस त्यौहार में माना गया है।  यह महाभारत काल से जुड़ा है ,  जब पांडवों ने अपने हथियार शमी वृक्ष में छिपाये थे।  आज भी इस वृक्ष की कई जगहों पर पूजा की जाती है।   -ज्ञान के सम्मान का दिन :  आयुध पूजा के साथ जुड़ा हुआ है।  इस दिन छात्र किताबों , कॉपियों की पूजा करते है।   आयुध पूजा के लिए घर की सजावट  १ .  साफ – सफ़ाई : पूजा से पहले सभी औजारों और उपकरणों की अच्छी तरह सफाई करें।  उनपे कुमकुम व हल्दी का तिलक लगाया जाता है।   २ . रंगोली और दीप : पूजा के सधन पर सुन्दर रंगोली बनाएं  ३ . रोशनी और सजावट :  फूलों की लड़ियाँ दरवाज़े पर सजाएं बिजली की रंगीन लाइट्स का प्रयोग करे।  ४ .  उपहार और प्रसाद दें।  जिससे खुशनुमा वातावरण बने।  भाईचारे की भावना को मजबूत बनाता है।   “जीवन चलने का नाम  चलते रहो सुबह शाम “ ये गाने की पंक्ति भी गायक ने जीवन में काम की महत्वता ही समझायी है।   निष्कर्ष: काम का सम्मान और भविष्य की तैयारी – यह है याद दिलाता है की हमारी सफलता किस्मत से ज्यादा , काम व् हमारी मेहनत, हमारे औजार और हमारी आत्म-विश्वास  पर निर्भर करती है।   FAQs १ .आयुध पूजा और सरस्वती पूजा में क्या अंतर है? उ.  सरल शब्दों में, आयुध पूजा काम से जुड़े औज़ारों की पूजा है, जबकि सरस्वती पूजा ज्ञान की देवी और शिक्षा से जुड़ी चीज़ों की पूजा है। २ .  हम आयुध पूजा के दौरान वाहनों के लिए पूजा क्यों करते हैं? उ.  वाहन की पूजा करके हम एक तरह से उसके प्रति अपना सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। हम मानते हैं कि जैसे एक तलवार ने योद्धा को जीत दिलाई, उसी तरह आज एक गाड़ी हमें अपने काम में सफलता दिलाती है। यह हमें यह याद भी दिलाता है कि हमें अपने औज़ारों का ध्यान रखना चाहिए और उनकी देखभाल करनी चाहिए। ३ . क्या आयुध पूजा केवल भारत में मनाई जाती है? उ.  आयुध पूजा, नवरात्रि और दशहरा जैसे बड़े त्योहारों का एक हिस्सा है, जिसे भारत के बाहर रहने वाले लोग भी बड़े उत्साह (enthusiasm) से मनाते हैं। नेपाल: नेपाल में दशहरा को दशैन के नाम से मनाया जाता है, और यह त्योहार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। मलेशिया, सिंगापुर, और दूसरे देश: मलेशिया और सिंगापुर जैसे देशों में भी, जहाँ भारतीय लोग बड़ी संख्या (large number) में रहते हैं, आयुध पूजा को मनाया जाता है। यूरोप, अमेरिका, और ऑस्ट्रेलिया: अमेरिका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया के बड़े शहरों में, लोग नवरात्रि के दौरान इस त्योहार को मनाते हैं।

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Diwali ke liye baccho ke liye aasan nibandh 1500 word

diwali ke liye baccho ke liye aasan nibandh 1500 word:  प्रस्तावना-भारत त्योहारों का देश है और यहाँ हर पर्व किसी न किसी विशेष मान्यता से जुड़ा हुआ है। इन पर्वों में दीवाली या दीपावली का स्थान सबसे विशेष है। इसे “प्रकाश का त्योहार” कहा जाता है। यह पर्व केवल धार्मिक महत्व ही नहीं रखता बल्कि इसमें सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक समन्वय भी दिखाई देता है। diwali ke liye baccho ke liye aasan nibandh 1500 word दीवाली का इतिहास और पौराणिक महत्व  दीवाली पर निबंध Diwali Essay 2025 easy दीपावली से जुड़ी अनेक कथाएँ प्रचलित हैं— 1. भगवान श्रीराम का अयोध्या आगमन –त्रेतायुग में जब श्रीरामचन्द्रजी ने रावण का वध कर 14 वर्ष का वनवास पूरा किया, तब अयोध्यावासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया। यही परंपरा दीपावली कहलायी। 2. माता लक्ष्मी का प्राकट्य –समुद्र मंथन के समय माँ लक्ष्मी समुद्र से प्रकट हुईं। तभी से दीवाली को धन और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। 3. नरक चतुर्दशी –कृष्ण ने नरकासुर का वध कर असंख्य बंदियों को मुक्त कराया। इस दिन को “नरक चतुर्दशी” के रूप में मनाया जाता है। 4. जैन और सिख परंपराएँ –जैन धर्म में दीवाली को भगवान महावीर के निर्वाण दिवस के रूप में मनाया जाता है। वहीं सिख धर्म में यह पर्व गुरु हरगोविंद जी की रिहाई से जुड़ा है। — 🌺 दीवाली का धार्मिक महत्व हिंदू धर्म – इसे माँ लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा का दिन माना जाता है। जैन धर्म – आत्मज्ञान और मोक्ष का प्रतीक। सिख धर्म – बंधन मुक्ति दिवस। दीवाली की तैयारियाँ -दीवाली पर निबंध diwali ke liye baccho ke liye aasan nibandh 1500 word दीवाली आने से पहले घर-घर में सफाई होती है। पुरानी वस्तुएँ हटाकर नई खरीदी जाती है। लोग कपड़े, बर्तन, मिठाइयाँ और सजावट की सामग्री खरीदते हैं। बाजारों में रौनक छा जाती है।— 🏠 दीवाली मनाने की परंपरा 1. घरों और मंदिरों में दीपक जलाए जाते हैं। 2. रंगोली बनाई जाती है। 3. लक्ष्मी-गणेश की पूजा होती है। 4. आतिशबाज़ी और पटाखों से उत्सव का माहौल बनता है। 5. लोग रिश्तेदारों और मित्रों को मिठाई बाँटते हैं। पर्यावरण और दीवाली-दीवाली पर निबंध diwali ke liye baccho ke liye aasan nibandh 1500 word 2025 में सबसे बड़ी चुनौती पर्यावरण प्रदूषण है। पटाखों से ध्वनि और वायु प्रदूषण बढ़ता है। इसलिए अब लोग ग्रीन क्रैकर्स और पर्यावरण-मित्र दीवाली मनाने की ओर अग्रसर हो रहे हैं।— 📱 डिजिटल युग की दीवाली 2025 की दीवाली पहले से अलग है। अब: लोग ऑनलाइन शॉपिंग करते हैं। डिजिटल ग्रीटिंग कार्ड्स और व्हाट्सऐप शुभकामनाएँ भेजते हैं। वर्चुअल पूजा और लाइव आर्टिफिशियल इवेंट्स भी लोकप्रिय हो रहे हैं। — 💰 आर्थिक महत्व दीपावली व्यापारिक दृष्टि से भी सबसे बड़ा पर्व है। इस समय इलेक्ट्रॉनिक, कपड़ा, आभूषण, मिठाई और सजावटी बाजार की बिक्री कई गुना बढ़ जाती है। यह रोजगार और अर्थव्यवस्था को गति देता है। — 🧘‍♀️ सामाजिक महत्व दीवाली केवल रोशनी का पर्व नहीं, बल्कि यह हमें अंधकार से प्रकाश, असत्य से सत्य और अज्ञान से ज्ञान की ओर बढ़ने की प्रेरणा देता है। यह पारिवारिक और सामाजिक रिश्तों को मजबूत बनाता है। — 🌎 2025 में दीवाली के नए आयाम पर्यावरण-संरक्षण केंद्रित दीवाली – अधिकतर शहरों में इको-फ्रेंडली दीवाली अभियान चलाए जाते हैं। सेवा भाव की दीवाली – कई लोग गरीबों और ज़रूरतमंदों में कपड़े, मिठाई और दीपक बाँटते हैं। ग्लोबल फेस्टिवल – अब दीवाली केवल भारत तक सीमित नहीं रही। अमेरिका, यूरोप, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया आदि में भारतीय समुदाय इसे बड़े उत्साह से मनाता है। — 🌟 दीवाली से मिलने वाली सीख 1. अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ना। 2. बुराई पर अच्छाई की विजय। 3. एकता और भाईचारे को बढ़ाना। 4. स्वच्छता और स्वास्थ्य के महत्व को समझना। —diwali ke liye baccho ke liye aasan nibandh 1500 word 🪔 निष्कर्ष दीवाली भारत की सांस्कृतिक आत्मा है। यह त्योहार केवल दीप जलाने का नहीं बल्कि दिलों को रोशन करने का अवसर है। हमें चाहिए कि हम इस पर्व को स्वच्छ, सुरक्षित, पर्यावरण-मित्र और सामाजिक रूप से उपयोगी बनाएँ। तभी इसकी वास्तविक महत्ता बनी रहेगी। ब्लॉग पैटर्न (FAQ Section)-दीवाली पर निबंध Diwali Essay 2025 easy प्रश्न 1: दीवाली क्यों मनाई जाती है?उत्तर: भगवान राम के अयोध्या लौटने, माँ लक्ष्मी के प्राकट्य और बुराई पर अच्छाई की जीत की स्मृति में। प्रश्न 2: 2025 में दीवाली कब है?उत्तर: 2025 में दीवाली 20 अक्टूबर को मनाई जाएगी। प्रश्न 3: दीवाली मनाने का सबसे अच्छा तरीका क्या है?उत्तर: स्वच्छता, दीप जलाना, पूजा-अर्चना, जरूरतमंदों की मदद करना और प्रदूषण रहित उत्सव मनाना। प्रश्न 4: दीवाली का सबसे बड़ा संदेश क्या है?उत्तर: प्रकाश, सत्य और अच्छाई की विजय। https://www.jagranjosh.com/https://hindi.webdunia.com/ must read; https://mplekhan.com/income-tax-kaise-bhare-2025-easy/

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आयकर रिटर्न (Income Tax Return) कैसे भरें? – Step by Step गाइड (2025)

Income tax kaise bhare 2025 easy-भारत जैसे बड़े देश में टैक्स व्यवस्था सरकार की आय का सबसे प्रमुख स्रोत है। टैक्स से ही सरकार देश के विकास कार्य, सड़कें, शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों पर खर्च करती है। हर व्यक्ति, जिसकी आय तय सीमा से अधिक है, उसे Income Tax Return (ITR) दाखिल करना ज़रूरी होता है। लेकिन आज भी बहुत से लोग इसे जटिल और कठिन मानते हैं। इस ब्लॉग में हम विस्तार से समझेंगे कि Income Tax Return क्या होता है, क्यों ज़रूरी है, इसके प्रकार कौन-कौन से हैं और इसे Online कैसे भर सकते हैं। 1. Income Tax Return (ITR) क्या है? Income tax kaise bhare 2025 easy Income Tax Return एक आधिकारिक दस्तावेज़ है जिसे आयकर विभाग (Income Tax Department of India) के पास जमा किया जाता है। इसमें व्यक्ति या संस्था अपनी सालभर की आय, निवेश और टैक्स भुगतान की जानकारी देती है। ITR का महत्व: यह आपकी आय और टैक्स भुगतान का प्रमाण है। ज़्यादा टैक्स कट जाने पर Refund पाने के लिए ITR ज़रूरी है। Loan, Visa, Credit Card जैसी सुविधाओं में यह आय का सबूत होता है। ITR न भरने पर Penalty और कानूनी कार्रवाई हो सकती है। 2. किसे ITR भरना अनिवार्य है? भारत सरकार के अनुसार, निम्नलिखित लोगों को ITR भरना ज़रूरी है: 1. जिनकी सालाना आय (Basic Exemption Limit) से ज़्यादा है। 60 साल से कम: ₹2.5 लाख 60–80 साल: ₹3 लाख 80 साल से ऊपर: ₹5 लाख 2. यदि आपकी Income Taxable Limit से कम है, लेकिन: आपने ₹1 करोड़ से अधिक बैंक में जमा या निकासी की है। आपके पास Foreign Assets हैं। आपने ₹2 लाख से अधिक की विदेशी यात्रा पर खर्च किया है। आपने ₹1 लाख से अधिक का बिजली बिल भरा है। 3. ITR Filing के लिए ज़रूरी दस्तावेज़ Income tax kaise bhare 2025 easy ITR भरने से पहले ये दस्तावेज़ आपके पास होने चाहिए: आवश्यक दस्तावेज़ उपयोग PAN Card Income Tax Filing के लिए IdentificationAadhaar Card Authentication और E-VerificationForm 16 Salary वालों के लिए Tax और Salary का विवरणForm 26AS / AIS आपके ऊपर काटे गए TDS और Advance Tax की जानकारीBank Account Details Refund और लेन-देन का रिकॉर्डInvestment Proofs LIC, PPF, ELSS, NPS, Home Loan आदिOther Income Proofs Interest, Rent, Freelance Income, Business Income 4. ITR Forms के प्रकार आयकर विभाग ने अलग-अलग करदाताओं के लिए अलग-अलग ITR Forms बनाए हैं। मुख्य ITR Forms: 1. ITR-1 (Sahaj): Salary और Pension वालों के लिए। आय ₹50 लाख से कम हो। केवल एक मकान (House Property) हो। 2. ITR-2: जिनके पास Salary + Capital Gains + 2 या उससे अधिक Properties हों। Foreign Income वालों के लिए। 3. ITR-3: Business या Profession से आय वालों के लिए। Chartered Accountants, Doctors, Lawyers आदि। 4. ITR-4 (Sugam): छोटे व्यापारी, Shopkeepers और Freelancers। Presumptive Taxation Scheme वाले। 5. ITR Filing की प्रक्रिया (Step by Step Guide)   Step 1: Income Tax Portal पर लॉगिन 1. Income Tax e-Filing Portal खोलें। 2. Login करें – User ID (PAN), Password और Captcha डालें। 3. OTP से Aadhaar Verify करें। Step 2: ITR Filing का विकल्प चुनें “File Income Tax Return” पर क्लिक करें। Assessment Year चुनें (जैसे: 2024–25)। Individual / HUF / Company Category चुनें। Step 3: ITR Form चुनें अपनी आय के हिसाब से ITR-1, ITR-2, ITR-3 या ITR-4 चुनें। Step 4: Income Details भरें Salary, House Property, Capital Gains और Other Sources (FD Interest, Rent आदि) भरें। Form 26AS और AIS से Verify करें। Step 5: Deductions Claim करें Section 80C (LIC, PPF, ELSS, Home Loan Principal, Tuition Fees) Section 80D (Health Insurance Premium) Section 24(b) (Home Loan Interest) Section 80G (Donations) Step 6: Tax Calculation Portal अपने-आप Tax Calculate करेगा। अगर Tax ज़्यादा भरा है → Refund मिलेगा। अगर Tax कम भरा है → Extra Tax Pay करना होगा। Step 7: ITR Submit और E-Verify सभी Details Check करें और Submit करें। अब E-Verification करना ज़रूरी है: Aadhaar OTP से Net Banking से या Digital Signature से — 6. ITR Filing में सामान्य गलतियाँ बहुत से लोग ITR भरते समय ये गलतियाँ कर देते हैं: Form 26AS और AIS को Verify न करना। सभी Bank Accounts की जानकारी न देना। गलत ITR Form चुन लेना। Deductions Proof अपलोड न करना। E-Verification भूल जाना। — 7. ITR Filing के फायदे ✔ Loan और Credit Card लेने में आसानी✔ Visa के लिए Income Proof✔ Extra भरे गए टैक्स पर Refund✔ कानूनी सुरक्षा और पारदर्शिता✔ Future Planning और Financial Record 8. ITR Filing न करने के नुकसान ₹1,000 से ₹5,000 तक की Penalty। Refund खो सकते हैं। Tax Evasion Case में कानूनी कार्रवाई। Loan और Visa Applications Rejected हो सकते हैं। 9. New Tax Regime बनाम Old Tax Regime (तुलना तालिका) Particulars Old Regime New Regime Basic Exemption Limit ₹2.5 लाख ₹3 लाखSlab Rates 5%, 20%, 30% 5%, 10%, 15%, 20%, 25%, 30%Deductions Allowed हाँ (80C, 80D आदि) नहींकिसके लिए बेहतर? जिनके पास ज़्यादा Investments हैं जिनके पास कम Deductions हैं 10. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs) Q1. क्या हर किसी को ITR भरना ज़रूरी है?नहीं, सिर्फ उन्हीं को ITR भरना है जिनकी आय टैक्सेबल लिमिट से ऊपर है या जो विशेष शर्तें पूरी करते हैं। Q2. ITR Filing की आखिरी तारीख कब होती है?आमतौर पर 31 जुलाई (Assessment Year के लिए)। Q3. क्या बिना CA के ITR भरा जा सकता है?हाँ, आप खुद Online ITR File कर सकते हैं। Q4. ITR भरने के बाद Refund कब मिलता है?आमतौर पर 15–45 दिनों के भीतर। Q5. अगर ITR न भरें तो क्या होगा?Penalty लगेगी और भविष्य में Loan व Visa Applications प्रभावित होंगे।

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राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा पर निबंध (2500 शब्द)
भूमिका-

राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा पर निबंध -in Hindi 1000+ भारत एक आस्था प्रधान देश है। यहाँ धर्म, संस्कृति और अध्यात्म का गहरा संबंध है। करोड़ों वर्षों से इस देश की पहचान उसकी धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों से होती रही है। इसी परंपरा का एक जीवंत उदाहरण है अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर। प्रभु श्रीराम केवल एक धार्मिक प्रतीक ही नहीं, बल्कि वे मर्यादा पुरुषोत्तम, आदर्श राजा, आदर्श पुत्र और आदर्श पुरुष के रूप में पूजनीय हैं।22 जनवरी 2024 को श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में भव्य प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव संपन्न हुआ। यह क्षण न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि सांस्कृतिक और राष्ट्रीय दृष्टि से भी ऐतिहासिक था। यह अवसर भारत की आत्मा, आस्था और अस्मिता का प्रतीक बन गया। राम मंदिर का ऐतिहासिक पृष्ठभूमि1. प्राचीन मान्यता – अयोध्या को सदियों से श्रीराम की जन्मभूमि माना जाता है। स्कंदपुराण, वाल्मीकि रामायण और अन्य ग्रंथों में अयोध्या को “अयोध्या नगरी” के रूप में वर्णित किया गया है। 2. मध्यकालीन काल – 16वीं शताब्दी में यहाँ एक विवादित ढांचा निर्मित किया गया था। धीरे-धीरे यह स्थान धार्मिक विवाद का केंद्र बन गया। 3. आंदोलन और संघर्ष – आज़ादी के बाद कई दशकों तक राम जन्मभूमि आंदोलन चलता रहा। लाखों रामभक्तों ने मंदिर निर्माण के लिए आंदोलन, यात्रा और बलिदान दिया।  4. न्यायिक फैसला – 9 नवंबर 2019 को भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने अयोध्या भूमि विवाद पर ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए पूरे क्षेत्र को श्रीराम जन्मभूमि न्यास को सौंप दिया। 5. शिलान्यास और निर्माण – 5 अगस्त 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राम मंदिर का भूमिपूजन और शिलान्यास किया। इसके बाद तेजी से निर्माण कार्य प्रारंभ हुआ। राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा (22 जनवरी 2024) प्राण प्रतिष्ठा का अर्थ है – किसी मूर्ति या देव विग्रह में मंत्रोच्चार, यज्ञ और अनुष्ठानों के माध्यम से दिव्य शक्ति का आह्वान करना। यह प्रक्रिया मूर्ति को केवल एक शिल्पकृति से भगवान का सजीव स्वरूप बना देती है। 22 जनवरी 2024 को रामलला की मूर्ति का प्राण प्रतिष्ठा समारोह अत्यंत भव्य और ऐतिहासिक था।देश-विदेश से संत, महात्मा, विद्वान और भक्त उपस्थित हुए।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं एक भक्त की तरह पूजा-अर्चना में भाग लिया।इस अवसर पर वैदिक मंत्रों की ध्वनि, घंटों और शंखनाद से सम्पूर्ण वातावरण पावन हो उठा।पूरे भारत में इस दिन को “रामोत्सव” के रूप में मनाया गया। रामलला की दिव्य मूर्ति राम मंदिर के गर्भगृह में स्थापित रामलला की मूर्ति काले श्याम पत्थर से बनी है। इसे प्रसिद्ध मूर्तिकार योगी राज अरुण ने तैयार किया।मूर्ति में बाल स्वरूप श्रीराम को दर्शाया गया है।उनके चेहरे पर अद्भुत तेज और करुणा का भाव है।हाथ में धनुष-बाण, माथे पर तिलक और पैरों में कमलासन की मुद्रा उन्हें दिव्यता प्रदान करती है। सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व राम मंदिर का निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा केवल एक धार्मिक घटना नहीं, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक एकता और पुनर्जागरण का प्रतीक है।यह घटना हमें रामायण के आदर्शों – सत्य, धर्म, त्याग और मर्यादा – को अपनाने की प्रेरणा देती है।मंदिर देश की करोड़ों जनता की आस्था का केन्द्र है।यह भारत की प्राचीन परंपरा और आधुनिकता के बीच सेतु का कार्य करता है। सामाजिक दृष्टिकोण राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा का समाज पर गहरा प्रभाव पड़ा।1. एकता का संदेश – इसने सभी भारतीयों को जोड़ने का काम किया।2. गौरव की अनुभूति – लंबे संघर्ष के बाद अपने आराध्य का भव्य मंदिर देखकर लोगों में गर्व की भावना जागी।3. धार्मिक पर्यटन – अयोध्या अब वैश्विक स्तर पर एक प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्र बन गया है। इससे स्थानीय रोजगार और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिला।4. नैतिक शिक्षा – श्रीराम का आदर्श जीवन समाज को नैतिकता और सदाचार का मार्ग दिखाता है। राष्ट्रीय और वैश्विक दृष्टिकोण यह अवसर केवल भारत ही नहीं, बल्कि विश्वभर के रामभक्तों के लिए महत्वपूर्ण था।नेपाल, श्रीलंका, थाईलैंड, इंडोनेशिया, मॉरीशस, अमेरिका और अन्य देशों में भी विशेष उत्सव मनाया गया।इससे भारत की “सॉफ्ट पावर” यानी सांस्कृतिक प्रभावशक्ति विश्व स्तर पर बढ़ी। राम मंदिर और आधुनिक भारत राम मंदिर का निर्माण आज के भारत के लिए कई संदेश देता है –1. धैर्य और संघर्ष का फल – यह दर्शाता है कि सत्य और धर्म की विजय अंततः निश्चित है।2. राष्ट्रीय अस्मिता – मंदिर केवल ईंट और पत्थरों से नहीं बना, बल्कि करोड़ों भारतीयों की आस्था से खड़ा हुआ है।3. विकास और समृद्धि – अयोध्या अब एक आधुनिक नगरी के रूप में विकसित हो रही है। चौड़ी सड़कें, रेलवे स्टेशन, हवाई अड्डा और पर्यटन सुविधाएँ तेजी से तैयार की गईं। FAQ Q. राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा 2025 में कब होगी? A. राम मंदिर में भूतल पर रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा 22 जनवरी 2024 को हो चुकी है। इसके बाद 5 जून, 2025 को मंदिर के प्रथम तल पर ‘राम दरबार’ और राजा राम की प्राण-प्रतिष्ठा की गई। यह तीन दिवसीय आध्यात्मिक कार्यक्रम था, जिसमें वैदिक विद्वानों ने भाग लिया और यह मंदिर के पहले चरण के निर्माण के पूरा होने का प्रतीक था। Q. राम मंदिर के निर्माता कौन हैं A. अयोध्या में जो नया राम मंदिर बना है उसका निर्माण लार्सन एंड टूब्रो द्वारा किया गया है, जबकि चंद्रकांत सोमपुरा इसके वास्तुकार थे। इससे पहले, सम्राट विक्रमादित्य ने इस भूमि पर राम मंदिर का निर्माण करवाया था, जिसे बाद में 1528 में बाबर के आदेश पर मीर बाकी ने तोड़ दिया था और उसकी जगह बाबरी मस्जिद बनवा दी थी। Q. अयोध्या में कौन सी नदी बहती है? A.अयोध्या सरयू नदी के तट पर स्थित है. यह पवित्र नदी उत्तर प्रदेश में बहती है और इसे घाघरा नदी के नाम से भी जाना जाता है. रामायण और कई अन्य धार्मिक ग्रंथों में इस नदी का उल्लेख आता है. also read the article on second pran pratishtha https://www.business-standard.com/india-news/pran-pratishtha-ram-darbar-ayodhya-temple-up-hanuman-idol-125060500491_1.html  

राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा पर निबंध (2500 शब्द)
भूमिका-
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