Hindi school article

पोषण पखवाड़ा 2025 1024x724

पोषण अभियान : 2025 भारत का पोषण अभियान आपका योगदान

पोषण पखवाड़ा: 2025 भारत का पोषण अभियान आपका योगदान पोषण पखवाड़ा क्या है ? –पोषण अभियान पोषण पखवाड़ा: 2025 भारत का पोषण अभियान आपका योगदान- भारत में पोषण और स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए हर साल पोषण पखवाड़ा मनाया जाता है यह एक जन आंदोलन भी है जिसका उद्देश्य सबको बच्चों ,  महिलाओं , धात्रिमताओं , का पोषण पर ध्यान लाना भी है क्यूंकि ये सभी वह समूह हैं जिनको सबसे ज्यादा सही पोषण की उनके शरीर द्वारा मांग रहती है किंतु कम जानकारी या जानकारी के अभाव में , व आर्थिक व्यवस्था आदि भी पोषण में कमी के मुख्य कारणों में से एक हैं।  इसी समस्या पर काम करने व् बच्चों और महिलाओं का  स्वास्थ्य सुधारने के काम के लिए भारत सरकार के ‘पोषण अभियान’ (National Nutrition Mission) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसे 2018 में शुरू किया गया था। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं में पोषण के स्तर में सुधार लाना था। यह एक 15 दिनों का कार्यक्रम है जो भारत में पोषण की कमी और कुपोषण जैसी समस्याओं से लड़ने के लिए शुरू किया गया है। पोषण पखवाड़ा का महत्व: यह क्यों ज़रूरी है? यह कार्यक्रम लोगों को यह सिखाता है कि स्वस्थ रहने के लिए महंगे भोजन की ज़रूरत नहीं है, बल्कि स्थानीय रूप से उपलब्ध और मौसमी फल और सब्ज़ियाँ ही सबसे ज़्यादा पौष्टिक होती हैं। पोषण पखवाड़ा का महत्व सिर्फ़ सही भोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वच्छता से भी जुड़ा है। यह कार्यक्रम साफ़-सफ़ाई के महत्व पर भी ज़ोर देता है, क्योंकि गंदगी से होने वाली बीमारियाँ भी कुपोषण का कारण बनती हैं। पोषण पखवाड़ा सिर्फ़ एक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि एक स्वस्थ राष्ट्र की नींव है। इसके कई महत्वपूर्ण उद्देश्य हैं: जागरूकता बढ़ाना: यह लोगों को संतुलित आहार (balanced diet), स्वच्छता (hygiene  ), और पोषण(nutrition  )  के महत्व के बारे में जागरूक करता है। सही जानकारी के बिना, लोग अक्सर ग़लत खान-पान के तरीक़े अपनाते हैं। कुपोषण से लड़ना: भारत में आज भी कुपोषण एक बड़ी समस्या है। पोषण पखवाड़ा इस समस्या को जड़ से ख़त्म करने के लिए सरकार और जनता को एक साथ लाता है। स्थानीय और मौसमी भोजन को बढ़ावा देना: यह कार्यक्रम लोगों को यह सिखाता है कि स्वस्थ रहने के लिए महंगे भोजन की ज़रूरत नहीं है, बल्कि स्थानीय रूप से उपलब्ध और मौसमी फल और सब्ज़ियाँ ही सबसे ज़्यादा पौष्टिक होती हैं। स्वच्छता का महत्व: पोषण सिर्फ़ सही भोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वच्छता से भी जुड़ा है। यह कार्यक्रम साफ़-सफ़ाई के महत्व पर भी ज़ोर देता है, क्योंकि गंदगी से होने वाली बीमारियाँ भी कुपोषण का कारण बनती हैं। पोषण पखवाड़ा के मुख्य विषय (Themes) हर साल, पोषण पखवाड़ा एक नए विषय (theme) पर केंद्रित होता है। ये विषय समाज के सबसे ज़रूरी पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं: पौष्टिक आहार: सही और पौष्टिक आहार को पहचानना और उसे अपनी डाइट में शामिल करना। स्वच्छता: साफ़-सफ़ाई और सही तरीक़े से हाथ धोना। बच्चों का स्वास्थ्य: छोटे बच्चों के सही विकास के लिए पोषण का महत्व। आप पोषण पखवाड़ा का हिस्सा कैसे बन सकते हैं? पोषण पखवाड़ा एक जन आंदोलन है, और इसमें हर नागरिक योगदान दे सकता है। जागरूकता फैलाएं: आप अपने दोस्तों और परिवार के साथ पोषण से जुड़ी जानकारी साझा कर सकते हैं। पौष्टिक भोजन अपनाएं: अपनी डाइट में पौष्टिक भोजन को शामिल करें और बच्चों को भी इसके बारे में सिखाएं। साफ़-सफ़ाई रखें: अपने घर और आस-पास की जगहों को साफ़ रखें। पोषण पखवाड़ा: 2025 भारत का पोषण अभियान आपका योगदान निष्कर्ष: स्वस्थ जीवन की ओर एक सकारात्मक कदम पोषण पखवाड़ा भारत को एक स्वस्थ और सशक्त राष्ट्र बनाने की दिशा में एक बहुत ही सकारात्मक और महत्वपूर्ण कदम है। यह हमें सिखाता है कि पोषण और स्वास्थ्य सिर्फ़ सरकार की ज़िम्मेदारी नहीं, बल्कि हम सबकी सामूहिक ज़िम्मेदारी है। अगर हम सब मिलकर इस अभियान का हिस्सा बनें, तो हम कुपोषण को ख़त्म कर सकते हैं और एक स्वस्थ भारत का निर्माण कर सकते हैं। FAQs for पोषण पखवाड़ा  1 . पोषण पखवाड़ा कब मनाया जाता है ?   उत्तर –   राष्ट्रीय पोषण माह हर साल सितंबर में मनाया जाता है, जो पोषण पखवाड़ा से अलग है।    पोषण पखवाड़ा और राष्ट्रीय पोषण माह में अंतर पोषण पखवाड़ा (Poshan Pakhwada): कब: यह हर साल मार्च या अप्रैल में मनाया जाता है। कितने दिन: यह एक 15 दिनों का कार्यक्रम है। क्यों: इसका मुख्य उद्देश्य पोषण और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। राष्ट्रीय पोषण माह (Rashtriya Poshan Maah): कब: यह हर साल सितंबर के महीने में मनाया जाता है। कितने दिन: यह पूरे एक महीने का कार्यक्रम है। क्यों: इसका उद्देश्य भी पोषण और कुपोषण की समस्या से लड़ना है, लेकिन यह एक बड़ा और महीने भर चलने वाला अभियान है। 2.  पोषण पखवाड़ा के मुख्य उद्देश्य क्या है ?  उत्तर –  जागरूकता बढ़ाना: यह लोगों को संतुलित आहार (balanced diet), स्वच्छता, और पोषण के महत्व के बारे में जागरूक करता है। सही जानकारी के बिना, लोग अक्सर ग़लत खान-पान के तरीक़े अपनाते हैं। कुपोषण से लड़ना: भारत में आज भी कुपोषण एक बड़ी समस्या है। पोषण पखवाड़ा इस समस्या को जड़ से ख़त्म करने के लिए सरकार और जनता को एक साथ लाता है। स्थानीय और मौसमी भोजन को बढ़ावा देना: यह कार्यक्रम लोगों को यह सिखाता है कि स्वस्थ रहने के लिए महंगे भोजन की ज़रूरत नहीं है, बल्कि स्थानीय रूप से उपलब्ध और मौसमी फल और सब्ज़ियाँ ही सबसे ज़्यादा पौष्टिक होती हैं। स्वच्छता का महत्व: पोषण सिर्फ़ सही भोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वच्छता से भी जुड़ा है। यह कार्यक्रम साफ़-सफ़ाई के महत्व पर भी ज़ोर देता है, क्योंकि गंदगी से होने वाली बीमारियाँ भी कुपोषण का कारण बनती हैं। सामुदायिक भागीदारी: पोषण पखवाड़ा एक जन आंदोलन है, जिसका उद्देश्य हर नागरिक को इसका हिस्सा बनाना है। 3. पोषण पखवाड़ा का मुख्य लक्ष्य क्या है? उत्तर -इस कार्यक्रम का मुख्य लक्ष्य बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं के स्वास्थ्य में सुधार लाना है। इसका उद्देश्य लोगों को संतुलित आहार, स्वच्छता, और स्वास्थ्य के महत्व के बारे में जागरूक करना है ताकि कुपोषण की समस्या को

पोषण अभियान : 2025 भारत का पोषण अभियान आपका योगदान Read More »

AyudhaPuja 20250923 001545 0000 1024x683

आयुध पूजा 2025 : सफलता,और काम का शानदार त्योहार

आयुध पूजा : इतिहास , महत्व और रौचक तथ्य आयुध पूजा 2025 : काम के सम्मान का त्यौहार है – जैसा की हम सभी कहते रहते हैं –  “काम से ही हमारी रोज़ी रोटी होती है,  काम से ही हमारी जीवन ज्योति होती है। “ तो कहने का भाव है की काम से ही हमारा जीवन यापन होता है ,  हमारा सारा घर संसार , छोटी छोटी ज़रूरतों से लेकर बड़े बड़े ख्वाब सब हमारे काम की कमाई से ही तो पूरे होते हैं।  इसलिए एक पुरानी कहावत है “काम ही पूजा है ” इस चीज़ के महत्व को मनाने वाला त्यौहार है आयुध पूजा।  यह त्यौहार हर उस उपकरण जैसे ज्ञान और मेहनत का सम्मान है न की सिर्फ हत्यारों और औज़ारों की पूजा। यह वो साड़ी चीजें है जो हमारे जीवन और काम में हमारी सहायता करते हैं।  आयुध पूजा 2025-का एतिहासिक और पौराणिक महत्व  इस त्यौहार को एक कहानी द्वारा समझा जा सकता है , जिससे हम यह सीखते हैं की अच्छाई की जीत में काम व शक्ति का सही प्रयोग सबसे ज़्यादा ज़रूरी है।   देवी दुर्गा की विजय महिषासुर के ऊपर  आयुध पूजा का महत्व नवरात्री के त्यौहार से है पौराणिक कथाओं में बताया गया है की एक महिषासुर नाम का एक ताकतवर , बलशाली राक्षस था जिसने देवताओं को परेशान कर रखा था। उसे हारने के लिए सभी देवताओं ने अपनी शक्तियां मिलकर देवी दुर्गा को बनाया। देवी दुर्गा ने दस दिनों तक महिषासुर से युद्ध किया और नवमी के दिन वह पराजित हुआ! इस युद्ध में जिन हथियारों को इस्तेमाल कर के देवताओं द्वारा दिए गए थे।  युद्ध के बाद उन्होंने उन सभी हथियारों और औजारों को शुद्ध किया और उनकी पूजा की।  इसलिए आयुध पूजा मनाई जाती है।  आयुध पूजा का गहरा अर्थ व महत्त्व  काम और मेहनत का सम्मान ;   – जैसे एक किसान के लिए -हल , ट्रेक्टर  -इंजीनियर के लिए – कम्प्यूटर , लैपटॉप  -शिक्षक के लिए – उसकी किताबें , पेन इन सभी औजारों की पूजा।  इस त्योहार का मकसद उन उपकरणों को धन्यवाद देना है जो हमारी सफलता के पीछे की ताकत है.  आयुध पूजा 2025 के रोचक तथ्य  -विभिन्न जगहों पर :  आयुध पूजा अलग अलग नामों द्वारा जाना जाता है , दक्षिण भारत में इसे “अस्त्र पूजा ” कहते है  -अलग अलग व्यवसाय : इस पर्व को योद्धा या किसान ही नहीं मनाते बल्कि इसे कलाकार अपने ब्रशेज़ और कैनवास की पूजा करके ,  और संगीतकार अपने संगीत के औज़ार  जैसे हारमोनियम , सितार आदि।  -शमी वृक्ष का बहुत महत्त्व इस त्यौहार में माना गया है।  यह महाभारत काल से जुड़ा है ,  जब पांडवों ने अपने हथियार शमी वृक्ष में छिपाये थे।  आज भी इस वृक्ष की कई जगहों पर पूजा की जाती है।   -ज्ञान के सम्मान का दिन :  आयुध पूजा के साथ जुड़ा हुआ है।  इस दिन छात्र किताबों , कॉपियों की पूजा करते है।   आयुध पूजा के लिए घर की सजावट  १ .  साफ – सफ़ाई : पूजा से पहले सभी औजारों और उपकरणों की अच्छी तरह सफाई करें।  उनपे कुमकुम व हल्दी का तिलक लगाया जाता है।   २ . रंगोली और दीप : पूजा के सधन पर सुन्दर रंगोली बनाएं  ३ . रोशनी और सजावट :  फूलों की लड़ियाँ दरवाज़े पर सजाएं बिजली की रंगीन लाइट्स का प्रयोग करे।  ४ .  उपहार और प्रसाद दें।  जिससे खुशनुमा वातावरण बने।  भाईचारे की भावना को मजबूत बनाता है।   “जीवन चलने का नाम  चलते रहो सुबह शाम “ ये गाने की पंक्ति भी गायक ने जीवन में काम की महत्वता ही समझायी है।   निष्कर्ष: काम का सम्मान और भविष्य की तैयारी – यह है याद दिलाता है की हमारी सफलता किस्मत से ज्यादा , काम व् हमारी मेहनत, हमारे औजार और हमारी आत्म-विश्वास  पर निर्भर करती है।   FAQs १ .आयुध पूजा और सरस्वती पूजा में क्या अंतर है? उ.  सरल शब्दों में, आयुध पूजा काम से जुड़े औज़ारों की पूजा है, जबकि सरस्वती पूजा ज्ञान की देवी और शिक्षा से जुड़ी चीज़ों की पूजा है। २ .  हम आयुध पूजा के दौरान वाहनों के लिए पूजा क्यों करते हैं? उ.  वाहन की पूजा करके हम एक तरह से उसके प्रति अपना सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। हम मानते हैं कि जैसे एक तलवार ने योद्धा को जीत दिलाई, उसी तरह आज एक गाड़ी हमें अपने काम में सफलता दिलाती है। यह हमें यह याद भी दिलाता है कि हमें अपने औज़ारों का ध्यान रखना चाहिए और उनकी देखभाल करनी चाहिए। ३ . क्या आयुध पूजा केवल भारत में मनाई जाती है? उ.  आयुध पूजा, नवरात्रि और दशहरा जैसे बड़े त्योहारों का एक हिस्सा है, जिसे भारत के बाहर रहने वाले लोग भी बड़े उत्साह (enthusiasm) से मनाते हैं। नेपाल: नेपाल में दशहरा को दशैन के नाम से मनाया जाता है, और यह त्योहार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। मलेशिया, सिंगापुर, और दूसरे देश: मलेशिया और सिंगापुर जैसे देशों में भी, जहाँ भारतीय लोग बड़ी संख्या (large number) में रहते हैं, आयुध पूजा को मनाया जाता है। यूरोप, अमेरिका, और ऑस्ट्रेलिया: अमेरिका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया के बड़े शहरों में, लोग नवरात्रि के दौरान इस त्योहार को मनाते हैं।

आयुध पूजा 2025 : सफलता,और काम का शानदार त्योहार Read More »

DIwaliessay2500words 20250916 100611 0000 1024x724

Diwali ke liye baccho ke liye aasan nibandh 1500 word

diwali ke liye baccho ke liye aasan nibandh 1500 word:  प्रस्तावना-भारत त्योहारों का देश है और यहाँ हर पर्व किसी न किसी विशेष मान्यता से जुड़ा हुआ है। इन पर्वों में दीवाली या दीपावली का स्थान सबसे विशेष है। इसे “प्रकाश का त्योहार” कहा जाता है। यह पर्व केवल धार्मिक महत्व ही नहीं रखता बल्कि इसमें सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक समन्वय भी दिखाई देता है। diwali ke liye baccho ke liye aasan nibandh 1500 word दीवाली का इतिहास और पौराणिक महत्व  दीवाली पर निबंध Diwali Essay 2025 easy दीपावली से जुड़ी अनेक कथाएँ प्रचलित हैं— 1. भगवान श्रीराम का अयोध्या आगमन –त्रेतायुग में जब श्रीरामचन्द्रजी ने रावण का वध कर 14 वर्ष का वनवास पूरा किया, तब अयोध्यावासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया। यही परंपरा दीपावली कहलायी। 2. माता लक्ष्मी का प्राकट्य –समुद्र मंथन के समय माँ लक्ष्मी समुद्र से प्रकट हुईं। तभी से दीवाली को धन और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। 3. नरक चतुर्दशी –कृष्ण ने नरकासुर का वध कर असंख्य बंदियों को मुक्त कराया। इस दिन को “नरक चतुर्दशी” के रूप में मनाया जाता है। 4. जैन और सिख परंपराएँ –जैन धर्म में दीवाली को भगवान महावीर के निर्वाण दिवस के रूप में मनाया जाता है। वहीं सिख धर्म में यह पर्व गुरु हरगोविंद जी की रिहाई से जुड़ा है। — 🌺 दीवाली का धार्मिक महत्व हिंदू धर्म – इसे माँ लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा का दिन माना जाता है। जैन धर्म – आत्मज्ञान और मोक्ष का प्रतीक। सिख धर्म – बंधन मुक्ति दिवस। दीवाली की तैयारियाँ -दीवाली पर निबंध diwali ke liye baccho ke liye aasan nibandh 1500 word दीवाली आने से पहले घर-घर में सफाई होती है। पुरानी वस्तुएँ हटाकर नई खरीदी जाती है। लोग कपड़े, बर्तन, मिठाइयाँ और सजावट की सामग्री खरीदते हैं। बाजारों में रौनक छा जाती है।— 🏠 दीवाली मनाने की परंपरा 1. घरों और मंदिरों में दीपक जलाए जाते हैं। 2. रंगोली बनाई जाती है। 3. लक्ष्मी-गणेश की पूजा होती है। 4. आतिशबाज़ी और पटाखों से उत्सव का माहौल बनता है। 5. लोग रिश्तेदारों और मित्रों को मिठाई बाँटते हैं। पर्यावरण और दीवाली-दीवाली पर निबंध diwali ke liye baccho ke liye aasan nibandh 1500 word 2025 में सबसे बड़ी चुनौती पर्यावरण प्रदूषण है। पटाखों से ध्वनि और वायु प्रदूषण बढ़ता है। इसलिए अब लोग ग्रीन क्रैकर्स और पर्यावरण-मित्र दीवाली मनाने की ओर अग्रसर हो रहे हैं।— 📱 डिजिटल युग की दीवाली 2025 की दीवाली पहले से अलग है। अब: लोग ऑनलाइन शॉपिंग करते हैं। डिजिटल ग्रीटिंग कार्ड्स और व्हाट्सऐप शुभकामनाएँ भेजते हैं। वर्चुअल पूजा और लाइव आर्टिफिशियल इवेंट्स भी लोकप्रिय हो रहे हैं। — 💰 आर्थिक महत्व दीपावली व्यापारिक दृष्टि से भी सबसे बड़ा पर्व है। इस समय इलेक्ट्रॉनिक, कपड़ा, आभूषण, मिठाई और सजावटी बाजार की बिक्री कई गुना बढ़ जाती है। यह रोजगार और अर्थव्यवस्था को गति देता है। — 🧘‍♀️ सामाजिक महत्व दीवाली केवल रोशनी का पर्व नहीं, बल्कि यह हमें अंधकार से प्रकाश, असत्य से सत्य और अज्ञान से ज्ञान की ओर बढ़ने की प्रेरणा देता है। यह पारिवारिक और सामाजिक रिश्तों को मजबूत बनाता है। — 🌎 2025 में दीवाली के नए आयाम पर्यावरण-संरक्षण केंद्रित दीवाली – अधिकतर शहरों में इको-फ्रेंडली दीवाली अभियान चलाए जाते हैं। सेवा भाव की दीवाली – कई लोग गरीबों और ज़रूरतमंदों में कपड़े, मिठाई और दीपक बाँटते हैं। ग्लोबल फेस्टिवल – अब दीवाली केवल भारत तक सीमित नहीं रही। अमेरिका, यूरोप, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया आदि में भारतीय समुदाय इसे बड़े उत्साह से मनाता है। — 🌟 दीवाली से मिलने वाली सीख 1. अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ना। 2. बुराई पर अच्छाई की विजय। 3. एकता और भाईचारे को बढ़ाना। 4. स्वच्छता और स्वास्थ्य के महत्व को समझना। —diwali ke liye baccho ke liye aasan nibandh 1500 word 🪔 निष्कर्ष दीवाली भारत की सांस्कृतिक आत्मा है। यह त्योहार केवल दीप जलाने का नहीं बल्कि दिलों को रोशन करने का अवसर है। हमें चाहिए कि हम इस पर्व को स्वच्छ, सुरक्षित, पर्यावरण-मित्र और सामाजिक रूप से उपयोगी बनाएँ। तभी इसकी वास्तविक महत्ता बनी रहेगी। ब्लॉग पैटर्न (FAQ Section)-दीवाली पर निबंध Diwali Essay 2025 easy प्रश्न 1: दीवाली क्यों मनाई जाती है?उत्तर: भगवान राम के अयोध्या लौटने, माँ लक्ष्मी के प्राकट्य और बुराई पर अच्छाई की जीत की स्मृति में। प्रश्न 2: 2025 में दीवाली कब है?उत्तर: 2025 में दीवाली 20 अक्टूबर को मनाई जाएगी। प्रश्न 3: दीवाली मनाने का सबसे अच्छा तरीका क्या है?उत्तर: स्वच्छता, दीप जलाना, पूजा-अर्चना, जरूरतमंदों की मदद करना और प्रदूषण रहित उत्सव मनाना। प्रश्न 4: दीवाली का सबसे बड़ा संदेश क्या है?उत्तर: प्रकाश, सत्य और अच्छाई की विजय। https://www.jagranjosh.com/https://hindi.webdunia.com/ must read; https://mplekhan.com/income-tax-kaise-bhare-2025-easy/

Diwali ke liye baccho ke liye aasan nibandh 1500 word Read More »

Incometaxkesefillkare 20250916 014805 0000 1024x724

आयकर रिटर्न (Income Tax Return) कैसे भरें? – Step by Step गाइड (2025)

Income tax kaise bhare 2025 easy-भारत जैसे बड़े देश में टैक्स व्यवस्था सरकार की आय का सबसे प्रमुख स्रोत है। टैक्स से ही सरकार देश के विकास कार्य, सड़कें, शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों पर खर्च करती है। हर व्यक्ति, जिसकी आय तय सीमा से अधिक है, उसे Income Tax Return (ITR) दाखिल करना ज़रूरी होता है। लेकिन आज भी बहुत से लोग इसे जटिल और कठिन मानते हैं। इस ब्लॉग में हम विस्तार से समझेंगे कि Income Tax Return क्या होता है, क्यों ज़रूरी है, इसके प्रकार कौन-कौन से हैं और इसे Online कैसे भर सकते हैं। 1. Income Tax Return (ITR) क्या है? Income tax kaise bhare 2025 easy Income Tax Return एक आधिकारिक दस्तावेज़ है जिसे आयकर विभाग (Income Tax Department of India) के पास जमा किया जाता है। इसमें व्यक्ति या संस्था अपनी सालभर की आय, निवेश और टैक्स भुगतान की जानकारी देती है। ITR का महत्व: यह आपकी आय और टैक्स भुगतान का प्रमाण है। ज़्यादा टैक्स कट जाने पर Refund पाने के लिए ITR ज़रूरी है। Loan, Visa, Credit Card जैसी सुविधाओं में यह आय का सबूत होता है। ITR न भरने पर Penalty और कानूनी कार्रवाई हो सकती है। 2. किसे ITR भरना अनिवार्य है? भारत सरकार के अनुसार, निम्नलिखित लोगों को ITR भरना ज़रूरी है: 1. जिनकी सालाना आय (Basic Exemption Limit) से ज़्यादा है। 60 साल से कम: ₹2.5 लाख 60–80 साल: ₹3 लाख 80 साल से ऊपर: ₹5 लाख 2. यदि आपकी Income Taxable Limit से कम है, लेकिन: आपने ₹1 करोड़ से अधिक बैंक में जमा या निकासी की है। आपके पास Foreign Assets हैं। आपने ₹2 लाख से अधिक की विदेशी यात्रा पर खर्च किया है। आपने ₹1 लाख से अधिक का बिजली बिल भरा है। 3. ITR Filing के लिए ज़रूरी दस्तावेज़ Income tax kaise bhare 2025 easy ITR भरने से पहले ये दस्तावेज़ आपके पास होने चाहिए: आवश्यक दस्तावेज़ उपयोग PAN Card Income Tax Filing के लिए IdentificationAadhaar Card Authentication और E-VerificationForm 16 Salary वालों के लिए Tax और Salary का विवरणForm 26AS / AIS आपके ऊपर काटे गए TDS और Advance Tax की जानकारीBank Account Details Refund और लेन-देन का रिकॉर्डInvestment Proofs LIC, PPF, ELSS, NPS, Home Loan आदिOther Income Proofs Interest, Rent, Freelance Income, Business Income 4. ITR Forms के प्रकार आयकर विभाग ने अलग-अलग करदाताओं के लिए अलग-अलग ITR Forms बनाए हैं। मुख्य ITR Forms: 1. ITR-1 (Sahaj): Salary और Pension वालों के लिए। आय ₹50 लाख से कम हो। केवल एक मकान (House Property) हो। 2. ITR-2: जिनके पास Salary + Capital Gains + 2 या उससे अधिक Properties हों। Foreign Income वालों के लिए। 3. ITR-3: Business या Profession से आय वालों के लिए। Chartered Accountants, Doctors, Lawyers आदि। 4. ITR-4 (Sugam): छोटे व्यापारी, Shopkeepers और Freelancers। Presumptive Taxation Scheme वाले। 5. ITR Filing की प्रक्रिया (Step by Step Guide)   Step 1: Income Tax Portal पर लॉगिन 1. Income Tax e-Filing Portal खोलें। 2. Login करें – User ID (PAN), Password और Captcha डालें। 3. OTP से Aadhaar Verify करें। Step 2: ITR Filing का विकल्प चुनें “File Income Tax Return” पर क्लिक करें। Assessment Year चुनें (जैसे: 2024–25)। Individual / HUF / Company Category चुनें। Step 3: ITR Form चुनें अपनी आय के हिसाब से ITR-1, ITR-2, ITR-3 या ITR-4 चुनें। Step 4: Income Details भरें Salary, House Property, Capital Gains और Other Sources (FD Interest, Rent आदि) भरें। Form 26AS और AIS से Verify करें। Step 5: Deductions Claim करें Section 80C (LIC, PPF, ELSS, Home Loan Principal, Tuition Fees) Section 80D (Health Insurance Premium) Section 24(b) (Home Loan Interest) Section 80G (Donations) Step 6: Tax Calculation Portal अपने-आप Tax Calculate करेगा। अगर Tax ज़्यादा भरा है → Refund मिलेगा। अगर Tax कम भरा है → Extra Tax Pay करना होगा। Step 7: ITR Submit और E-Verify सभी Details Check करें और Submit करें। अब E-Verification करना ज़रूरी है: Aadhaar OTP से Net Banking से या Digital Signature से — 6. ITR Filing में सामान्य गलतियाँ बहुत से लोग ITR भरते समय ये गलतियाँ कर देते हैं: Form 26AS और AIS को Verify न करना। सभी Bank Accounts की जानकारी न देना। गलत ITR Form चुन लेना। Deductions Proof अपलोड न करना। E-Verification भूल जाना। — 7. ITR Filing के फायदे ✔ Loan और Credit Card लेने में आसानी✔ Visa के लिए Income Proof✔ Extra भरे गए टैक्स पर Refund✔ कानूनी सुरक्षा और पारदर्शिता✔ Future Planning और Financial Record 8. ITR Filing न करने के नुकसान ₹1,000 से ₹5,000 तक की Penalty। Refund खो सकते हैं। Tax Evasion Case में कानूनी कार्रवाई। Loan और Visa Applications Rejected हो सकते हैं। 9. New Tax Regime बनाम Old Tax Regime (तुलना तालिका) Particulars Old Regime New Regime Basic Exemption Limit ₹2.5 लाख ₹3 लाखSlab Rates 5%, 20%, 30% 5%, 10%, 15%, 20%, 25%, 30%Deductions Allowed हाँ (80C, 80D आदि) नहींकिसके लिए बेहतर? जिनके पास ज़्यादा Investments हैं जिनके पास कम Deductions हैं 10. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs) Q1. क्या हर किसी को ITR भरना ज़रूरी है?नहीं, सिर्फ उन्हीं को ITR भरना है जिनकी आय टैक्सेबल लिमिट से ऊपर है या जो विशेष शर्तें पूरी करते हैं। Q2. ITR Filing की आखिरी तारीख कब होती है?आमतौर पर 31 जुलाई (Assessment Year के लिए)। Q3. क्या बिना CA के ITR भरा जा सकता है?हाँ, आप खुद Online ITR File कर सकते हैं। Q4. ITR भरने के बाद Refund कब मिलता है?आमतौर पर 15–45 दिनों के भीतर। Q5. अगर ITR न भरें तो क्या होगा?Penalty लगेगी और भविष्य में Loan व Visa Applications प्रभावित होंगे।

आयकर रिटर्न (Income Tax Return) कैसे भरें? – Step by Step गाइड (2025) Read More »

Earth 20250907 182927 0000 724x1024

चंद्र ग्रहण 2025 (lunar eclipse) : ब्लड मून क्यों कहा जाता है

तो आखिर चंद्र ग्रहण 2025 बहुत चर्चा का विषय बन गया है, क्या आप जानते हैं, कि चंद्र ग्रहण क्या होता है? ये वो खगोलीय स्थिति है जब चंद्रमा पृथ्वी के पीछे उसकी प्रछाया में आ जाता है। ऐसा तब होता है जब पृथ्वी, चंद्रमा और सूर्य के ठीक बीच में होती है, तो पृथ्वी की छाया चंद्रमा की सतह पर पड़ती है, जिससे वह मंद पड़ जाता है । खबरों के अनुसार सितंबर 2025 में लगने वाला यह सबसे बड़ा चंद्र ग्रहण है । ब्लड मून 2025 (blood moon) क्या है? जब चंद्रमा का रंग लाल दिखता है तब उसे ब्लड मून कहते है । पूर्ण चंद्रग्रहण के समय चंद्रमा अक्सर लाल या ताम्रवर्णी दिखाई देता है। इसे “ब्लड मून” कहा जाता है। इसका कारण पृथ्वी का वायुमंडल है, जो सूर्य की लाल किरणों को मोड़कर चंद्रमा तक पहुँचाता है।                           चंद्र ग्रहण 2025 भारत में चंद्र ग्रहण का इतिहास: भारत में चंद्र ग्रहण का उल्लेख वेदों पुराणों और महाकाव्यों में मिलता है । ऋग्वेद और अर्थर्वेद में चंद्र ग्रहण के संदर्भ आते हैं । पुराणों में इसका कारण राहु केतु को बताया गया है, मान्यता है कि समुद्र मंथन के समय राहु ने अमृत पिया था, और विष्णु ने उसका सिर काट दिया था । उसी के बाद राहु और केतु ग्रहों के रूप में स्थापित हुए और वे सूर्य तथा चंद्रमा को समय- समय पर गर्सते हैं । चंद्रग्रहण तीन प्रकार का होता है: 1. उपछाया (Penumbral Eclipse) 2. आंशिक (Partial Eclipse) 3. पूर्ण (Total Eclipse) आज आनी 7-8 सितंबर की रात चंद्र ग्रहण (Lunar Eclipse 2025) लगने जा रहा है. आज लग रहे चंद्र ग्रहण को संसार के कुछ हिस्सों से देखा जा सकता है. इन हिस्सों में यूरोप, एशिया, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका, नॉर्थ अमेरिका का पश्चिमी हिस्सा, साउथ अमेरिका का पूर्वी हिस्सा, पेसिफिक, अटलांटिक, आर्कटिक, अंटार्कटिका और हिंद महासागर शामिल हैं. FAQ Q. आज का चंद्र ग्रहण कितने बजे से है 2025 में? A. ग्रहण की शुरुआत, आज रात 09 बजकर 58 मिनट पर होगी और ग्रहण की समाप्ति 08 सितंबर को रात 01 बजकर 26 मिनट पर होगी। Q. चंद्र ग्रहण टाइमिंग क्या है? A. रात 11:00 बजे से रात 12:22 बजे तक , Q. भारत में आज के चंद्र ग्रहण का समय कितना है? A. रात्रि 11.01 Q. चंद्र ग्रहण सूर्य ग्रहण कैसे लगता है? A. सूर्य के चारों ओर पृथ्वी की कक्षा की तुलना में थोड़ी झुकी हुई है। यदि पूर्णिमा के समय चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी एक सीध में आ जाते हैं, तो चंद्र ग्रहण होता है। Q. चंद्र ग्रहण का क्या मतलब है? A. जब पृथ्वी सीधे सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है तो उसकी सबसे गहरी छाया जिसे अम्ब्रा (Umbra) कहते हैं, चांद की सतह पर पड़ती है             चंद्र ग्रहण 2025 Q. चंद्र ग्रह के देवता कौन हैं? A. चंद्र ग्रह के हिंदू देवता सोम (या चंद्रदेव) हैं, Q. चाँद किसका पुत्र है A. पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चंद्रमा महर्षि अत्रि और देवी अनुसूया के पुत्र Q. सूतक काल क्या है? A. सूतक काल वह समय होता है जिसे अशुभ कहा जाता है. ग्रहण लगने से 9 घंटे पहले सूतक काल लग जाता है और माना जाता है कि इस समयावधि में कुछ कार्यों को करने की मनाही होती है.उस जगह लगता है जहां से ग्रहण नजर आता है. इस चंद्र ग्रहण

चंद्र ग्रहण 2025 (lunar eclipse) : ब्लड मून क्यों कहा जाता है Read More »

Rammandir 20250906 142727 0000 724x1024

राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा पर निबंध (2500 शब्द)
भूमिका-

राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा पर निबंध -in Hindi 1000+ भारत एक आस्था प्रधान देश है। यहाँ धर्म, संस्कृति और अध्यात्म का गहरा संबंध है। करोड़ों वर्षों से इस देश की पहचान उसकी धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों से होती रही है। इसी परंपरा का एक जीवंत उदाहरण है अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर। प्रभु श्रीराम केवल एक धार्मिक प्रतीक ही नहीं, बल्कि वे मर्यादा पुरुषोत्तम, आदर्श राजा, आदर्श पुत्र और आदर्श पुरुष के रूप में पूजनीय हैं।22 जनवरी 2024 को श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में भव्य प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव संपन्न हुआ। यह क्षण न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि सांस्कृतिक और राष्ट्रीय दृष्टि से भी ऐतिहासिक था। यह अवसर भारत की आत्मा, आस्था और अस्मिता का प्रतीक बन गया। राम मंदिर का ऐतिहासिक पृष्ठभूमि1. प्राचीन मान्यता – अयोध्या को सदियों से श्रीराम की जन्मभूमि माना जाता है। स्कंदपुराण, वाल्मीकि रामायण और अन्य ग्रंथों में अयोध्या को “अयोध्या नगरी” के रूप में वर्णित किया गया है। 2. मध्यकालीन काल – 16वीं शताब्दी में यहाँ एक विवादित ढांचा निर्मित किया गया था। धीरे-धीरे यह स्थान धार्मिक विवाद का केंद्र बन गया। 3. आंदोलन और संघर्ष – आज़ादी के बाद कई दशकों तक राम जन्मभूमि आंदोलन चलता रहा। लाखों रामभक्तों ने मंदिर निर्माण के लिए आंदोलन, यात्रा और बलिदान दिया।  4. न्यायिक फैसला – 9 नवंबर 2019 को भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने अयोध्या भूमि विवाद पर ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए पूरे क्षेत्र को श्रीराम जन्मभूमि न्यास को सौंप दिया। 5. शिलान्यास और निर्माण – 5 अगस्त 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राम मंदिर का भूमिपूजन और शिलान्यास किया। इसके बाद तेजी से निर्माण कार्य प्रारंभ हुआ। राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा (22 जनवरी 2024) प्राण प्रतिष्ठा का अर्थ है – किसी मूर्ति या देव विग्रह में मंत्रोच्चार, यज्ञ और अनुष्ठानों के माध्यम से दिव्य शक्ति का आह्वान करना। यह प्रक्रिया मूर्ति को केवल एक शिल्पकृति से भगवान का सजीव स्वरूप बना देती है। 22 जनवरी 2024 को रामलला की मूर्ति का प्राण प्रतिष्ठा समारोह अत्यंत भव्य और ऐतिहासिक था।देश-विदेश से संत, महात्मा, विद्वान और भक्त उपस्थित हुए।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं एक भक्त की तरह पूजा-अर्चना में भाग लिया।इस अवसर पर वैदिक मंत्रों की ध्वनि, घंटों और शंखनाद से सम्पूर्ण वातावरण पावन हो उठा।पूरे भारत में इस दिन को “रामोत्सव” के रूप में मनाया गया। रामलला की दिव्य मूर्ति राम मंदिर के गर्भगृह में स्थापित रामलला की मूर्ति काले श्याम पत्थर से बनी है। इसे प्रसिद्ध मूर्तिकार योगी राज अरुण ने तैयार किया।मूर्ति में बाल स्वरूप श्रीराम को दर्शाया गया है।उनके चेहरे पर अद्भुत तेज और करुणा का भाव है।हाथ में धनुष-बाण, माथे पर तिलक और पैरों में कमलासन की मुद्रा उन्हें दिव्यता प्रदान करती है। सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व राम मंदिर का निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा केवल एक धार्मिक घटना नहीं, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक एकता और पुनर्जागरण का प्रतीक है।यह घटना हमें रामायण के आदर्शों – सत्य, धर्म, त्याग और मर्यादा – को अपनाने की प्रेरणा देती है।मंदिर देश की करोड़ों जनता की आस्था का केन्द्र है।यह भारत की प्राचीन परंपरा और आधुनिकता के बीच सेतु का कार्य करता है। सामाजिक दृष्टिकोण राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा का समाज पर गहरा प्रभाव पड़ा।1. एकता का संदेश – इसने सभी भारतीयों को जोड़ने का काम किया।2. गौरव की अनुभूति – लंबे संघर्ष के बाद अपने आराध्य का भव्य मंदिर देखकर लोगों में गर्व की भावना जागी।3. धार्मिक पर्यटन – अयोध्या अब वैश्विक स्तर पर एक प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्र बन गया है। इससे स्थानीय रोजगार और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिला।4. नैतिक शिक्षा – श्रीराम का आदर्श जीवन समाज को नैतिकता और सदाचार का मार्ग दिखाता है। राष्ट्रीय और वैश्विक दृष्टिकोण यह अवसर केवल भारत ही नहीं, बल्कि विश्वभर के रामभक्तों के लिए महत्वपूर्ण था।नेपाल, श्रीलंका, थाईलैंड, इंडोनेशिया, मॉरीशस, अमेरिका और अन्य देशों में भी विशेष उत्सव मनाया गया।इससे भारत की “सॉफ्ट पावर” यानी सांस्कृतिक प्रभावशक्ति विश्व स्तर पर बढ़ी। राम मंदिर और आधुनिक भारत राम मंदिर का निर्माण आज के भारत के लिए कई संदेश देता है –1. धैर्य और संघर्ष का फल – यह दर्शाता है कि सत्य और धर्म की विजय अंततः निश्चित है।2. राष्ट्रीय अस्मिता – मंदिर केवल ईंट और पत्थरों से नहीं बना, बल्कि करोड़ों भारतीयों की आस्था से खड़ा हुआ है।3. विकास और समृद्धि – अयोध्या अब एक आधुनिक नगरी के रूप में विकसित हो रही है। चौड़ी सड़कें, रेलवे स्टेशन, हवाई अड्डा और पर्यटन सुविधाएँ तेजी से तैयार की गईं। FAQ Q. राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा 2025 में कब होगी? A. राम मंदिर में भूतल पर रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा 22 जनवरी 2024 को हो चुकी है। इसके बाद 5 जून, 2025 को मंदिर के प्रथम तल पर ‘राम दरबार’ और राजा राम की प्राण-प्रतिष्ठा की गई। यह तीन दिवसीय आध्यात्मिक कार्यक्रम था, जिसमें वैदिक विद्वानों ने भाग लिया और यह मंदिर के पहले चरण के निर्माण के पूरा होने का प्रतीक था। Q. राम मंदिर के निर्माता कौन हैं A. अयोध्या में जो नया राम मंदिर बना है उसका निर्माण लार्सन एंड टूब्रो द्वारा किया गया है, जबकि चंद्रकांत सोमपुरा इसके वास्तुकार थे। इससे पहले, सम्राट विक्रमादित्य ने इस भूमि पर राम मंदिर का निर्माण करवाया था, जिसे बाद में 1528 में बाबर के आदेश पर मीर बाकी ने तोड़ दिया था और उसकी जगह बाबरी मस्जिद बनवा दी थी। Q. अयोध्या में कौन सी नदी बहती है? A.अयोध्या सरयू नदी के तट पर स्थित है. यह पवित्र नदी उत्तर प्रदेश में बहती है और इसे घाघरा नदी के नाम से भी जाना जाता है. रामायण और कई अन्य धार्मिक ग्रंथों में इस नदी का उल्लेख आता है. also read the article on second pran pratishtha https://www.business-standard.com/india-news/pran-pratishtha-ram-darbar-ayodhya-temple-up-hanuman-idol-125060500491_1.html  

राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा पर निबंध (2500 शब्द)
भूमिका-
Read More »

Cda90576e717fd4e2464a8fbb53a4117

बाल मजदूरी – एक अभिशाप

“बालमजदूरी हमारे समाज की एक गंभीर समस्या है, जो न सिर्फ बच्चों का बचपन छीन लेती है, बल्कि उनके भविष्य को भी अंधकारमय बना देती है। शिक्षा और खेल के मैदान में रहने की उम्र में जब बच्चे मेहनत-मजदूरी करने को मजबूर होते हैं, तब यह केवल एक सामाजिक विफलता नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं का भी हनन है। इस ब्लॉग में हम बालमजदूरी के कारणों, प्रभावों और इसके समाधान की दिशा में उठाए जा सकने वाले कदमों पर चर्चा करेंगे।”

बाल मजदूरी – एक अभिशाप Read More »

Voters Day 1024x536

National voters day राष्ट्रीय मतदाता दिवस

भारत में राष्ट्रीय मतदाता दिवस 25 जनवरी को हर वर्ष आयोजित किया जाता है। ताकि सभी नागरिकों का ध्यान मतदान की ओर लाया जा सके व इस विषय की गंभीरता नागरिक समझ सके। national voters day

National voters day राष्ट्रीय मतदाता दिवस Read More »

error: Content is protected !!